यूपी-बिहार पंचायत चुनाव से पहले डुप्लीकेट मतदाता की पहचान, सवा करोड़ नाम हटेंगे

Lucknow । उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर सुधार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब सवा करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। यह कार्रवाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से हुई जांच के बाद हो रही है, जिसमें कई गाँवों में एक ही नाम और पिता के नाम वाले डुप्लीकेट मतदाता चिह्नित किए गए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिलाधिकारियों और बूथ-लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध नामों का घर-घर भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट दें। एआई ने अलग-अलग ग्राम पंचायतों की सूचियों को क्रॉस-मैच कर पाया कि कई स्थानों पर एक ही व्यक्ति का नाम, उम्र और लिंग के साथ वोटर लिस्ट में दर्ज है। 80 प्रतिशत तक समानता मिलने पर उन नामों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है। आयोग के मुताबिक, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फर्जी या डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ हटाई जाएँ ताकि वास्तविक मतदाताओं को ही मतदान का अधिकार मिले।

यूपी में इस प्रक्रिया के बाद मतदाता संख्या करीब 12 करोड़ के आसपास रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि अप्रैल-मई 2026 में पंचायत चुनाव कराए जा सकते हैं। इस बार चुनाव से पहले ही मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए बिहार की तर्ज पर बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।

बिहार में भी इसी तरह की प्रक्रिया हाल में की गई थी, जिसमें करीब 22 लाख मृतक और 7 लाख डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनावों को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में अहम साबित होगा, लेकिन इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। विपक्षी दल अक्सर मतदाता सूचियों में गड़बड़ी को लेकर सत्ताधारी दलों पर आरोप लगाते रहे हैं।

चुनाव आयोग का कहना है कि सिर्फ नाम या पिता के नाम में समानता का मतलब फर्जी मतदाता नहीं होता। हर संदिग्ध नाम की क्षेत्रीय और व्यक्तिगत जानकारी की पुष्टि होने के बाद ही अंतिम सूची तैयार की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा है कि भविष्य में सभी मतदाताओं को यूनिक EPIC नंबर के आधार पर जोड़कर ऐसी समस्याओं को स्थायी रूप से खत्म करने की दिशा में काम हो रहा है।

मतदाता सूची की शुद्धता न केवल लोकतंत्र को मजबूती देगी बल्कि चुनावी विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को भी कम करेगी। अब सबकी निगाहें आयोग की इस बड़ी कवायद के नतीजे और आगामी पंचायत चुनावों पर टिकी हैं।

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