यूपी में “लव ज़िहाद” कानून पास, अखिलेश का पलटवार

UP Vidhansabha session: Love Jihad bill passed in UP Vidhansabha

लव जिहाद या रोमियो जिहाद, इन शब्दों से आप क्या समझते हैं? जब पहली बार इन शब्दों का जिक्र हुआ तो लगा कि आतंकवादियों से जुड़ा कोई मामला है, क्योंकि ज्यादातर जिहाद जैसे शब्द आतंकवादियों वाले केस में सुनने को मिलते थे. लेकिन अब ये कहीं और सुनने को मिल रहा है. ये भी कई बार कहा गया कि एक अप्रमाणित साजिश सिद्धांत है, जो आरोप लगाता है कि मुस्लिम पुरुष शादी के माध्यम से इस्लाम में धर्मांतरण के लिए व्यवस्थित रूप से हिंदू महिलाओं को निशाना बनाते हैं और मुस्लिम पुरुष हिन्दू महिलाओं को धर्मांतरित करने के लिए प्रेम का दिखावा, धोखे, अपहरण और शादी जैसे तरीकों से लुभाते हैं। उनका मानना है की इसका उद्देश्य हिन्दुस्तान के खिलाफ मुस्लिमों द्वारा एक जनसांख्यिकीय “युद्ध” और अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत वर्चस्व स्थापित करना है। खैर इन बातों में कितना दम है ये तो इन बातों को करने वाले बेहतर बता सकते हैं. धर्मान्तरण के मामले तो इसाई समुदाय को लेकर भी आते हैं.

वैसे अब उत्तर प्रदेश में गुमराह कर शादी करने और अनुसूचित जाति व जनजाति (एससी-एसटी) के धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में आरोपी को अब आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। मंगलवार को यूपी विधानसभा में उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। विधानमंडल सत्र के दूसरे दिन विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। प्रदेश सरकार ने इससे पहले विधानसभा में धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2021 पारित किया था। इस विधेयक में एक से 10 साल तक की सजा का प्रावधान था।

संशोधन के जरिये पिछले विधेयक को सजा और जुर्माने की दृष्टि से और मजबूत किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी नाबालिग, दिव्यांग अथवा मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला, एससी-एसटी का धर्म परिवर्तन कराया जाता है तो दोषी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया जाएगा। इसी तरह, सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी।

यूपी सरकार ने सोमवार को विधानसभा में यह विधेयक पेश किया था जिसे मंगलवार को पास कर दिया गया। अब इसे विधान परिषद को भेजा जाएगा। दोनों सदनों से पारित होने के बाद राज्यपाल के पास जाएगा। फिर इसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। वही इस पर अंतिम फैसला लेंगी।

यह है विधेयक का मकसद

यह संशोधन विधेयक धर्म परिर्वतन के अपराध की संवेदनशीलता और गंभीरता के मद्देनजर लाया गया है। इससे विदेशी एवं राष्ट्र विरोधी ताकतों की संगठित साजिश को रोका जा सकेगा। इसी वजह से सजा और जुर्माने की राशि को बढ़ाने के साथ जमानत की कड़ी शर्तों के प्रावधान किए गये हैं। साथ ही नाबालिग, दिव्यांग और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को भी इस अपराध का शिकार होने से बचाया जा सकेगा।

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