उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन गुरुवार को चर्चा का दौर जारी रहा। सदन में जहां विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर प्रश्नोत्तर और बहस हुई, वहीं कई अवसरों पर हल्की नोकझोंक और हास्यपूर्ण टिप्पणियां भी देखने को मिलीं। कार्यवाही के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सवाल-जवाब का सिलसिला चलता रहा, जिसे स्पीकर सतीश महाना (Satish Mahana) ने संयमित ढंग से संचालित किया।
स्पीकर और मंत्रियों के बीच हल्की नोकझोंक:
कार्यवाही के दौरान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह (Dinesh Pratap Singh) जब स्पीकर सतीश महाना (Satish Mahana) के क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का उल्लेख कर रहे थे, तब स्पीकर ने मुस्कराते हुए टिप्पणी की कि यदि काम ही नहीं कराना है तो वहां रहने का क्या औचित्य है, काम करवाने के लिए ही तो जिम्मेदारी सौंपी गई है। सदन में इस टिप्पणी पर हल्की हंसी गूंज उठी।
इसी क्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप (Narendra Kashyap) निर्धारित समय से अधिक बोलते रहे तो स्पीकर ने उन्हें टोका। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि ऐसा न हो कि माइक बंद करना पड़े। इसके बाद मंत्री ने अपनी बात संक्षेप में समाप्त की।
विपक्ष के सवालों पर चुटीला अंदाज:
सपा विधायक आरके वर्मा (RK Verma) ने चार मिनट तक अपनी बात रखी, लेकिन स्पष्ट प्रश्न सामने न आने पर स्पीकर ने उनके बगल में बैठे कमाल अख्तर (Kamal Akhtar) से पूछा कि क्या उन्हें समझ में आया कि प्रश्न क्या था। इसके बाद उन्होंने संबंधित मंत्री से कहा कि आप भी दो मिनट में उत्तर दे दीजिए। सदन में यह पल भी चर्चा का विषय बना।
सपा विधायक राजेंद्र चौधरी (Rajendra Chaudhary) के प्रश्न पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही (Surya Pratap Shahi) जवाब दे रहे थे, तभी कुछ विधायकों ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। इस पर स्पीकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि विरोध करना है तो खड़े होकर नाम से बोलें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज किसी को नहीं रोका जाएगा, सब एक साथ बोल सकते हैं। इसके बाद स्थिति शांत हो गई और कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ी।
तकनीकी प्रशिक्षण और औद्योगिक इकाइयों का मुद्दा:
सत्र के दौरान सपा विधायक राकेश कुमार वर्मा (Rakesh Kumar Verma) ने वर्ष 2022 से 2025 तक पिछड़े वर्ग के युवक-युवतियों को तकनीकी प्रशिक्षण न दिए जाने का मुद्दा उठाया। वहीं संदीप सिंह पटेल (Sandeep Singh Patel) ने पूछा कि पिछले दो वर्षों में किन जिलों में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गई हैं।
जवाब में मंत्री नंद गोपाल नंदी (Nand Gopal Nandi) ने कहा कि ऐसा कोई जिला नहीं है जहां औद्योगिक इकाई स्थापित न की गई हो। उन्होंने सरकार की औद्योगिक नीति और विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए प्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन पर जोर दिया।
बजट और आगे की चर्चा:
इससे पहले 11 फरवरी को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने 9 लाख 12 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। बजट सत्र के दौरान विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा जारी है। संभावना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) भी बजट पर अपनी बात रख सकते हैं।
विधानसभा की कार्यवाही में जहां गंभीर मुद्दों पर विमर्श हुआ, वहीं संवाद की लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप तर्क-वितर्क और हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, जो संसदीय प्रक्रिया का हिस्सा मानी जाती है।
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