यूपी विधानसभा में विपक्ष-सरकार आमने-सामने, अफसरों की जवाबदेही और मुफ्त बिजली पर गरमाई बहस

उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttar Pradesh Vidhan Sabha) में बजट सत्र के आठवें दिन बुधवार को विभिन्न मुद्दों पर जोरदार चर्चा हुई। सदन में जनप्रतिनिधियों के फोन अधिकारियों द्वारा न उठाए जाने का मामला प्रमुखता से उठा, जिस पर अध्यक्ष सतीश महाना (Satish Mahana) ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि फोन करता है तो संबंधित अधिकारी का दायित्व है कि वह न केवल कॉल रिसीव करे, बल्कि सम्मानजनक व्यवहार भी सुनिश्चित करे।

फोन न उठाने के मुद्दे पर अध्यक्ष की टिप्पणी:
एक दिन पहले नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय (Mata Prasad Pandey) ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि दरोगा स्तर तक के अधिकारी भी उनका फोन नहीं उठाते। इस पर अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सदन में स्पष्ट निर्देश दिया कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ मर्यादित व्यवहार करना चाहिए।

किसानों को मुफ्त बिजली पर बहस:
सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान (Atul Pradhan) ने सिंचाई के लिए किसानों को मुफ्त बिजली न दिए जाने का प्रश्न उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में लगभग पांच लाख किसानों को सूची से बाहर कर दिया गया और उनके नाम जोड़े नहीं गए। इस पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (A K Sharma) ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि संभवतः वे किसान बाहर हुए होंगे जिन्होंने आवेदन नहीं किया होगा। जवाब से असंतुष्ट अतुल प्रधान ने मंत्री के बयान पर आपत्ति जताई, जिस पर अध्यक्ष ने ‘झूठ’ शब्द के प्रयोग को अनुचित बताया।

सदन में नोकझोंक और टिप्पणी:
समाजवादी पार्टी के विधायक ओम प्रकाश सिंह (Om Prakash Singh) जब अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो अध्यक्ष ने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि वे अक्सर मंत्री के विरोध में तुरंत खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि निजी संबंध सदन के बाहर निभाए जाएं। इसी दौरान शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मंत्री ऐसा प्रस्तुत कर रहे हैं जैसे वर्ष 2017 से पहले कोई कार्य ही नहीं हुआ। अध्यक्ष ने माहौल हल्का करते हुए कहा कि थोड़ा समायोजन कर लिया जाए।

मनरेगा और हाउस अरेस्ट का मुद्दा:
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा (Aradhana Mishra) ने मनरेगा से जुड़े विषय पर हाउस अरेस्ट किए जाने का प्रश्न उठाया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री ने पलटवार करते हुए टिप्पणी की कि वे सदन से बाहर क्यों गई थीं। इस दौरान सदन में कुछ समय के लिए माहौल तीखा रहा।

सड़कों की स्थिति पर बहस:
समाजवादी पार्टी के विधायक अनिल प्रधान (Anil Pradhan) ने अपने क्षेत्र की खराब सड़कों का मुद्दा उठाया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में सड़कों का नवीनीकरण पहले की तुलना में कम समय में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां पहले आठ वर्षों में नवीनीकरण होता था, अब पांच वर्षों में ही कार्य पूरा किया जा रहा है।

शिक्षा विभाग के जवाब पर असंतोष:
ओम प्रकाश सिंह द्वारा उठाए गए प्रश्न पर शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (Sandeep Singh) ने जवाब दिया। इस पर विधायक रागिनी सोनकर (Ragini Sonkar) असंतुष्ट नजर आईं और अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुईं। अध्यक्ष ने टिप्पणी की कि ओम प्रकाश सिंह का वक्तव्य उसी पक्ष की ओर से था। जब नेता प्रतिपक्ष के खड़े होने की बात आई तो अध्यक्ष ने माता प्रसाद पांडेय से कहा कि वे केवल अपनी इच्छा से ही खड़े हों। इस पर उन्होंने कहा कि उनका मन नहीं है।

सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा जारी रही और सदन की कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालित की गई।


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