लखनऊ (Lucknow) में आयोजित विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 के दौरान उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 तथा उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026 को सदन में पुरस्थापित किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने दोनों विधेयकों को प्रस्तुत करते हुए सदन से इन्हें पुरस्थापित करने की अनुमति का अनुरोध किया, जिस पर विचारोपरांत बहुमत से अनुज्ञा प्रदान कर दी गई। यह कदम प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सदन में विधेयकों की प्रस्तुति और अनुमति:
विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2026 को औपचारिक रूप से सदन के पटल पर रखा। विधेयकों को पुरस्थापित करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। सदन में इस प्रस्ताव पर मत व्यक्त कराया गया, जिसमें बहुमत से विधेयकों को पुरस्थापित करने की स्वीकृति दे दी गई। इस प्रक्रिया के साथ ही दोनों विधेयकों पर आगे की विधायी कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
उच्च शिक्षा सुधार की दिशा में पहल:
योगेन्द्र उपाध्याय ने सदन में अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन संशोधन विधेयकों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक ढांचे को सुदृढ़ करना है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
मंत्री ने कहा कि समय के साथ उच्च शिक्षा संस्थानों की आवश्यकताएं बदलती रहती हैं, ऐसे में कानून और नियमों में आवश्यक संशोधन कर उन्हें वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनाना जरूरी है। प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो विश्वविद्यालयों के कार्य संचालन को अधिक सुव्यवस्थित और उत्तरदायी बनाने में सहायक होंगे।
प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे को मजबूती:
विधेयकों के माध्यम से विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक तंत्र को अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया गया है। इसके साथ ही शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने की दिशा में भी पहल की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि विश्वविद्यालयों में निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी हो और शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों के हित में विकसित किया जाए।
योगेन्द्र उपाध्याय ने यह भी संकेत दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जवाबदेही और सुशासन को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जाते रहेंगे। इससे विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में स्पष्टता आएगी और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा होगी।
बजट सत्र में अहम विधायी कदम:
विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 के दौरान इन दोनों संशोधन विधेयकों का पुरस्थापन प्रदेश की शिक्षा नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बहुमत से अनुमति मिलना इस बात का संकेत है कि सदन ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य का समर्थन किया है। आगे की प्रक्रिया में विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
प्रदेश सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से विश्वविद्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को अधिक अनुकूल एवं सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#UttarPradesh #Lucknow #YogendraUpadhyay #UPVidhanSabha #HigherEducation