SIR के बाद यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में बदली चुनावी तस्वीर

यूपी में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस ड्राफ्ट सूची में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कट गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 18 फीसदी है। आंकड़े बताते हैं कि इस प्रक्रिया के बाद कई जिलों में मतदाता संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खासतौर पर राजधानी लखनऊ (Lucknow) समेत बड़े और धार्मिक जिलों में कटे नामों की संख्या ने सभी का ध्यान खींचा है।

राजधानी लखनऊ में सबसे बड़ा असर:
ड्राफ्ट सूची में सबसे ज्यादा असर राजधानी लखनऊ में देखने को मिला है। यहां करीब 30.05 फीसदी मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं। पहले लखनऊ में कुल 39.94 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जो अब घटकर 27.94 लाख रह गए हैं। यानी लगभग 12 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गए हैं। यह आंकड़ा प्रदेश में सबसे अधिक है, जिससे राजनीतिक दलों और प्रशासन दोनों में मंथन तेज हो गया है।

गाजियाबाद और बलरामपुर का हाल:
लखनऊ के बाद गाजियाबाद (Ghaziabad) दूसरे स्थान पर है, जहां 28.83 फीसदी मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। पहले यहां करीब 28 लाख मतदाता थे, जो अब घटकर 20 लाख के आसपास रह गए हैं। वहीं बलरामपुर (Balrampur) तीसरे नंबर पर है, जहां 25.98 फीसदी मतदाताओं के नाम कटे हैं। यहां 4 लाख से ज्यादा वोटरों का नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े आने वाले समय में यूपी की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

धार्मिक जिलों पर टिकी निगाहें:
SIR की ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद यूपी के प्रमुख धार्मिक जिलों—अयोध्या (Ayodhya), वाराणसी (Varanasi), मथुरा (Mathura), प्रयागराज (Prayagraj) और गोरखपुर (Gorakhpur)—पर सबसे ज्यादा नजर रही। इन जिलों में मतदाता संख्या में आई कमी को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

प्रयागराज में सबसे ज्यादा कटौती:
धार्मिक जिलों में सबसे ज्यादा 24.64 फीसदी वोट प्रयागराज में कटे हैं। पहले यहां 46,92,860 मतदाता थे, जो अब घटकर 35,36,554 रह गए हैं। यानी करीब 11.5 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हट गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां की 12 सीटों में से 8 पर एनडीए को जीत मिली थी, जबकि 4 सीटें सपा के खाते में गई थीं। इसके बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हाथों यह सीट एनडीए से निकल गई थी, जिससे यह जिला पहले से ही राजनीतिक चर्चा में रहा है।

मथुरा और वाराणसी की स्थिति:
मथुरा में 19.20 फीसदी मतदाताओं के नाम कटे हैं। पहले यहां 19,47,368 मतदाता थे, जो अब 15,73,574 रह गए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में यहां सभी 5 सीटों पर एनडीए ने जीत दर्ज की थी।
वाराणसी में 31,53,705 मतदाता पंजीकृत थे, जो अब घटकर 25,80,500 रह गए हैं। यानी यहां करीब 18.18 फीसदी वोट कटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधानसभा चुनाव के दौरान सभी 8 सीटों पर एनडीए को जीत मिली थी, इसलिए यहां के आंकड़े भी खास माने जा रहे हैं।

गोरखपुर और अयोध्या के आंकड़े:
गोरखपुर में पहले 36,66,533 मतदाता थे, जो अब 30,20,908 रह गए हैं। यानी करीब 17.61 फीसदी मतदाता कम हुए हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में यहां भाजपा ने क्लीन स्वीप किया था और गोरखपुर शहर सीट से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) विधायक हैं।
अयोध्या में पहले 19,07,800 मतदाता थे, जो अब घटकर 15,70,258 रह गए हैं। यहां करीब 17.69 फीसदी वोट कम हुए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के चलते यह सीट पहले ही चर्चा में रही थी, ऐसे में ड्राफ्ट सूची के आंकड़े राजनीतिक रूप से अहम माने जा रहे हैं।

राजनीतिक संकेत और विशेषज्ञों की राय:
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि SIR की ड्राफ्ट सूची केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह यूपी की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी दे रही है। जिन जिलों में ज्यादा वोट कटे हैं, वहां आगामी चुनावों में रणनीतियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम मतदाता सूची आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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