सबसे सीनियर IPS के पास 2 साल से काम नहीं:DGP समेत कई के पास एक्स्ट्रा चार्ज; यूपी पुलिस में अफसरों की कमी या भरोसे की?
उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग के भीतर जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विभाग में कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों को लंबे समय से कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी गई है, जबकि कुछ अधिकारियों के पास एक साथ कई अहम यूनिटों का अतिरिक्त चार्ज मौजूद है। इससे प्रशासनिक संतुलन और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
यूपी पुलिस की सबसे वरिष्ठ IPS अधिकारी रेणुका मिश्रा (Renuka Mishra) इसका बड़ा उदाहरण मानी जा रही हैं। 1990 बैच की अधिकारी रेणुका मिश्रा को फरवरी 2024 में सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के बाद Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board से हटा दिया गया था। करीब तीन महीने तक प्रतीक्षा सूची में रखने के बाद उन्हें DGP कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। खास बात यह है कि वह मौजूदा कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण (Rajeev Krishna) से भी वरिष्ठ हैं, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बावजूद उनके पास कोई स्वतंत्र जिम्मेदारी नहीं है।
एंटनी देव कुमार की पोस्टिंग पर भी चर्चा:
ADG रूल्स एंड मैन्युअल का पद भी विभाग में लंबे समय से कम सक्रिय जिम्मेदारी वाला माना जाता रहा है। इस पद पर एंटनी देव कुमार (Antony Dev Kumar) तैनात हैं। बताया जाता है कि इस पद पर कार्यभार अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि, एंटनी देव कुमार का प्रशासनिक अनुभव देश तक सीमित नहीं रहा है। उन्हें वर्ष 2004-05 में United Nations Interim Administration Mission in Kosovo (UNMIK) मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। उनका रिटायरमेंट भी निकट माना जा रहा है।
सात वर्षों से निलंबित हैं जसवीर सिंह:
1992 बैच के IPS अधिकारी और ADG रैंक के अधिकारी जसवीर सिंह (Jasveer Singh) पिछले सात वर्षों से निलंबित चल रहे हैं। उन्हें 14 फरवरी 2019 को सेवा नियमावली उल्लंघन के आरोप में सस्पेंड किया गया था। इसके बाद जांच प्रक्रिया भी चली, लेकिन अब तक मामला किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है। इतने लंबे समय तक लंबित स्थिति भी विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
नवनीत सिकेरा की तैनाती भी चर्चा में:
ADG नवनीत सिकेरा (Navniet Sekera) मार्च 2022 से उन्नाव स्थित Police Training School में तैनात हैं। विभागीय ढांचे की तुलना करें तो जालौन के Police Training School में उनसे दो रैंक नीचे DIG स्तर के अधिकारी की नियुक्ति है। वहीं, Sultanpur और Moradabad के प्रशिक्षण स्कूलों में SP रैंक के अधिकारी तैनात हैं। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती और जिम्मेदारियों को लेकर विभाग के भीतर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
कुछ अधिकारियों के पास कई यूनिटों का अतिरिक्त चार्ज:
एक ओर जहां कई वरिष्ठ अधिकारियों के पास सीमित या कोई जिम्मेदारी नहीं है, वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारियों के पास एक साथ कई महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार है। DG बीके सिंह (BK Singh) के पास CID, Cyber Crime और UP 112 जैसी अहम इकाइयों की जिम्मेदारी है। सामान्यतः Cyber Crime और UP 112 जैसे विभागों में IG या ADG स्तर के अधिकारियों की तैनाती होती रही है।
इसी प्रकार DG आलोक सिंह (Alok Singh) PAC के साथ-साथ SSF का अतिरिक्त चार्ज भी संभाल रहे हैं। DG डीके ठाकुर (DK Thakur) के पास Home Guard के साथ Civil Defence की जिम्मेदारी भी है। राजीव सब्बरवाल (Rajeev Sabharwal) Training विभाग के साथ Bhimrao Ambedkar Police Academy के निदेशक की भूमिका भी निभा रहे हैं।
ADG अमिताभ यश (Amitabh Yash) के पास STF के साथ-साथ कानून व्यवस्था की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी है। ए. सतीश गणेश (A Satish Ganesh) Traffic के अलावा Crime शाखा का कार्यभार देख रहे हैं। वहीं पद्मजा चौहान (Padmaja Chauhan) Fire Services के साथ महिला एवं बाल सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल हैं कई नाम:
कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के भरोसेमंद अधिकारियों में माना जाता है। भाजपा सरकार बनने के समय वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे और लौटने के बाद उनकी तैनाती BR Ambedkar Police Academy, Moradabad में हुई थी। बाद में उन्हें Lucknow और Agra Zone की जिम्मेदारी दी गई। वर्ष 2024 में DG रैंक पर प्रमोशन के बाद उन्हें Vigilance विभाग का कार्यभार मिला, जिसका चार्ज अभी भी उनके पास है। प्रशांत कुमार (Prashant Kumar) के रिटायरमेंट के बाद उन्हें कार्यवाहक DGP बनाया गया।
इसी तरह DG आलोक सिंह भी मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों में गिने जाते हैं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटने के बाद उन्हें पहले PAC East Zone का IG बनाया गया। इसके बाद Kanpur Range और फिर Meerut Range की जिम्मेदारी दी गई। बाद में Uttar Pradesh में Police Commissionerate System लागू होने पर उन्हें Gautam Buddh Nagar का पहला Police Commissioner नियुक्त किया गया। वर्तमान में वे PAC की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ADG अमिताभ यश का नाम भी मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में शामिल है। वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें STF की जिम्मेदारी दी गई थी। ADG रैंक पर प्रमोशन के बाद भी उन्हें STF में बनाए रखा गया। लंबे समय तक STF प्रमुख रहने का रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है। वर्ष 2024 में उन्हें कानून व्यवस्था की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
वरिष्ठ पत्रकार ने उठाए प्रशासनिक सवाल:
सीनियर जर्नलिस्ट राजेंद्र कुमार (Rajendra Kumar) का कहना है कि Uttar Pradesh में Cyber Crime जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में यदि एक अधिकारी के पास कई यूनिटों का कार्यभार होगा, तो वह हर विभाग को पूरा समय नहीं दे पाएगा। अलग-अलग यूनिटों के कार्यालय भी विभिन्न स्थानों पर होते हैं, जिससे समय प्रबंधन प्रभावित होता है और कार्य क्षमता पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार को लगता है कि कुछ अधिकारी एक साथ कई यूनिट संभाल सकते हैं, तो अधिकारियों की संख्या कम करने पर भी विचार किया जा सकता है। इससे सरकारी खर्च में कमी आने की संभावना भी बनेगी।
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