गाज़ीपुर में पुलिस, बवाल और मौत का तांडव!

अद्भुत विकास का मैटिनी शो यदि आपने टीवी पर देख लिया है तो एक नजर में यह भी देख लीजिए कि उस मैटिनी शो में क्या टीवी वालों ने आपके गांव का अभूतपूर्व विकास भी दिखाया है? खैर टीवी वालों ने दिखाया हो या ना दिखाया हो लेकिन यहां पर आपको अद्भुत लापरवाही और अभूतपूर्व विकास की तस्वीरें मैं दिखाने जा रहा हूं।

खैर आप इन तस्वीरों को मोबाइल टेबलेट लैपटॉप के अलावा स्मार्ट टीवी पर भी देख सकते हैं। लेकिन क्षमा चाहता हूं टीवी वालों जैसा नहीं दिखा सकता।

सक्षम लोग तो फर्राटा भरते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से लखनऊ और दिल्ली पहुंच रहे हैं लेकिन गाजीपुर के गांव का वह गरीब अपनी जमीन की लड़ाई लड़ते लड़ते कोतवाल से भी ना मिल सका। लार टपकाटी मौत ने उसे अपने आगोश में समेट लिया।

जमनिया के बेटाबर के रहने वाले उमाशंकर कुशवाहा अपने जमीनी विवाद को लेकर बेहद परेशान थे। अपनी फरियाद लेकर कोतवाली गए थे लेकिन उनकी मृत्यु हो जाती है। इसके पीछे का रहस्य क्या है आगे आपको बताते हैं लेकिन थोड़ा एक नजर डाली है ऐसे फरियादियों पर जो गांव से निकलकर अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तहसील और कोतवाली का चक्कर लगाते हैं लेकिन जिन रास्तों से होकर गुजरते हैं वह ना उन रास्तों का कभी विकास होता है ना उनके गांव का काफी विकास होता है गरीब गरीब ही रह जाता है और अमीर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर पहुंच जाता है।

हमारी सहयोगी जफर इकबाल ने जमानिया के विकास की कुछ अभूतपूर्व तस्वीरें दिखाई हैं। आप भी देखिए।

60 वर्षीय उमाशंकर कुशवाहा ने करीब 1 सप्ताह पूर्व जमीनी विवाद में हुए मारपीट के मामले में जमांनिया कोतवाली में प्रार्थना पत्र दिया था। खबरों के अनुसार इसी संबंध में 2 दिसंबर को उमाशंकर कुशवाहा को कोतवाली बुलाया भी गया था। लेकिन फिर उनकी मौत की खबर आती है। हर तरफ एक खबर वायरल हो जाती है कि उनकी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। लेकिन इस अफवाह को पुलिस अधीक्षक राम बदन सिंह दूर कर देते हैं।

लेकिन मामला यहीं नहीं खत्म हुआ। एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार 2 दिसंबर को सुबह उमाशंकर कुशवाहा को पुलिस ने फोन करके कोतवाली बुलाया था। जहां उन्हें बैठा दिया गया था। उनके छोटे भाई की पुत्री अनुष्का सिंह ने करीब शाम 5:00 बजे उनके मोबाइल पर फोन किया तुम्हें बताया कि वह कोतवाली में है और कोतवाल से मिलकर ही घर आएंगे। उसके बाद जब उमाशंकर कुशवाहा का कोई फोन नहीं आया तो शाम 7:00 बजे फिर उन्हें फोन किया गया तब उन्होंने बताया कि वह कोतवाली में है उन्हें कंबल मिल गया है चिंता की कोई बात नहीं है वह वहां सुरक्षित है। उनके सुरक्षित होने की बात सुनकर परिवार वाले संतुष्ट हो गए।

लेकिन 3 दिसंबर को जब उमाशंकर कुशवाहा के छोटे भाई के मोबाइल पर पुलिस का फोन आता है तो परिजनों के होश उड़ जाते हैं। खबरों के अनुसार परिजनों को बताया जाता है कि ओमप्रकाश कुशवाहा सड़क किनारे पड़े मिले थे वह बीमार थे उन्हें जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया है जब परिजन जिला चिकित्सालय पहुंचते हैं तो उनकी मौत हो चुकी होती है। पुलिस प्रशासन पर तमाम आरोप लगाए जाते हैं। लेकिन पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट कर दिया था कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सच सामने आ जाएगा।

लेकिन 5 दिसंबर को उमाशंकर कुशवाहा की मौत को लेकर ग्रामीण आक्रोशित हो जाते हैं और सड़क पर उतर जाते हैं। नारेबाजी होती है न्याय मांगा जाता है। हालात को बिगड़ता देख एसडीएम भरत भार्गव को वहां आना पड़ता है। एसडीएम ने कहा कि उमाशंकर कुशवाहा की मृत्यु प्राकृतिक कारणों से हुई है जो भी सरकारी मदद होती है वह उन्हें दिया जाएगा इसका वादा परिजनों से कर दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आज भी इस देश के कोने कोने में ऐसे तमाम लोग हैं जो न्याय के लिए दर दर की ठोकर खा रहे हैं। यदि उमाशंकर कुशवाहा को कोतवाली बुलाया गया था। तो वह फिर दिन भर कोतवाली में क्यों थे? दिन की बात छोड़िए। उन्होंने फोन पर यह क्यों कहा कि उन्हें कंबल मिल गया है? खैर पुलिस अधीक्षक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उमाशंकर कुशवाहा की मौत पुलिस कस्टडी में नहीं हुई है। लेकिन एक कड़वा सत्य को सबको बर्दाश्त करना ही होगा कि वो खोखले हो गए सिस्टम की भेंट चढ़ गए।

इसकी इसके अलावा एक लापरवाही जनपद गाजीपुर में और हुई वह लापरवाही हुई थी वाराणसी गाजीपुर हाईवे पर। 4 दिसंबर को रात में करीब 9:00 बजे वाराणसी गाजीपुर हाईवे पर तलवार मोड़ के पास एक ट्रक खड़ा था जिसमें एक बोलेरो आकर टकरा गई टक्कर इतनी जोरदार थी कि बोलेरो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसकी स्थिति नाजुक हो गई। इस दुर्घटना के पीछे सिस्टम की सबसे बड़ी लापरवाही थी। जो ट्रक उस हाईवे पर खड़ा था वह ट्रक भी उसी दिन सुबह दुर्घटना का शिकार हुआ था। लेकिन दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद उस ट्रक को हाईवे से हटाया नहीं गया था। जिसकी वजह से एक और दुर्घटना हो गई।

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