यूपी के 28 जिलों में सूखा, 78% तक कम बारिश:2 महीने में कैसे होगी भरपाई; अगस्त-सितंबर में स्थिति बिगड़ेगी या सुधरेंगे हालात…?

Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) में मानसून का आधा सीजन बीतने के बावजूद बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 31 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य से 27 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे अधिक असर Purvanchal (पूर्वांचल) के जिलों पर देखने को मिला है, जहां 28 जिलों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। इनमें 13 जिले गंभीर सूखे की श्रेणी में बताए गए हैं। मौसम विभाग ने पहले ही इस वर्ष सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया था, लेकिन मौजूदा आंकड़े स्थिति को और अधिक गंभीर दिखा रहे हैं।

मानसून के पहले दो महीनों में कम हुई बारिश:
India Meteorological Department (भारत मौसम विज्ञान विभाग-IMD) ने अप्रैल में जारी अपने पूर्वानुमान में अलनीनो के प्रभाव के कारण Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) सहित देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई थी। सामान्य रूप से प्रदेश में जून से सितंबर के बीच 820 से 840 मिलीमीटर वर्षा होती है, जबकि इस बार 754 से 773 मिलीमीटर वर्षा का अनुमान लगाया गया था। 31 जुलाई तक प्रदेश में सामान्य तौर पर 357.6 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 261.4 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।

पूर्वी और पश्चिमी यूपी के आंकड़ों में बड़ा अंतर:
बारिश के आंकड़ों में Eastern Uttar Pradesh (पूर्वी उत्तर प्रदेश) और Western Uttar Pradesh (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 जुलाई तक 385.2 मिलीमीटर वर्षा का सामान्य आंकड़ा है, जबकि इस बार केवल 254.2 मिलीमीटर वर्षा हुई, जो सामान्य से 34 प्रतिशत कम है। दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामान्य 318.9 मिलीमीटर के मुकाबले 271.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो लगभग 15 प्रतिशत कम है।

28 जिलों में सूखे जैसी स्थिति:
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 28 जिलों में सूखे की स्थिति बनी हुई है। इनमें 13 जिले गंभीर सूखे की श्रेणी में शामिल हैं। India Meteorological Department (भारत मौसम विज्ञान विभाग-IMD) के अनुसार किसी क्षेत्र में 25 से 50 प्रतिशत कम वर्षा होने पर उसे सूखे की स्थिति माना जाता है, जबकि 51 प्रतिशत या उससे अधिक वर्षा की कमी होने पर उसे गंभीर सूखे की श्रेणी में रखा जाता है।

जुलाई में जून के मुकाबले बेहतर रही स्थिति:
हालांकि जून की तुलना में जुलाई के दौरान वर्षा की स्थिति में कुछ सुधार दर्ज किया गया। जून के अंत तक प्रदेश में लगभग 60 प्रतिशत कम बारिश हुई थी और 34 जिले गंभीर सूखे की चपेट में थे। जुलाई में बेहतर वर्षा होने के बाद गंभीर सूखे वाले जिलों की संख्या घटकर 13 रह गई और कुल वर्षा की कमी भी घटकर 27 प्रतिशत पर आ गई। इसके बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में स्थिति अब भी सामान्य नहीं मानी जा रही है।

अलनीनो के बावजूद जुलाई में कैसे हुई बारिश:
India Meteorological Department (भारत मौसम विज्ञान विभाग-IMD) के पूर्व महानिदेशक Dr. K.J. Ramesh (डॉ. केजे रमेश) के अनुसार जुलाई में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश के पीछे दो प्रमुख कारण रहे। पहला, Philippines (फिलीपींस) के निकट Pacific Ocean (प्रशांत महासागर) का पानी असामान्य रूप से गर्म होने से बने साइक्लोनिक सिस्टम, जिसने Bay of Bengal (बंगाल की खाड़ी) में मजबूत निम्न दबाव क्षेत्र बनने में मदद की। दूसरा, सामान्य से अधिक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, जिसके कारण Arabian Sea (अरब सागर) से नमी मिली और वर्षा की स्थिति में सुधार हुआ।

अगस्त और सितंबर को लेकर क्या है अनुमान:
31 जुलाई को जारी India Meteorological Department (भारत मौसम विज्ञान विभाग-IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार 2 से 4 अगस्त के बीच प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। शुरुआती दिनों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में अपेक्षाकृत कम वर्षा हो सकती है, लेकिन बाद में मानसून की सक्रियता बढ़ने के संकेत हैं। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ सीमावर्ती जिलों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा की संभावना जताई गई है। हालांकि प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पूरे शेष मानसून सीजन के दौरान सामान्य से कम वर्षा होने के आसार बने हुए हैं।

पूर्वी यूपी में चिंता अधिक बनी हुई:
Regional Meteorological Centre (आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र) के वैज्ञानिक Atul Kumar Singh (अतुल कुमार सिंह) के अनुसार अगस्त और सितंबर के दौरान प्रदेश में सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम वर्षा होने की संभावना है। तापमान सामान्य से अधिक रहने के भी संकेत हैं। उन्होंने बताया कि Purvanchal (पूर्वांचल) के बड़े हिस्से, विशेष रूप से Gorakhpur (गोरखपुर), Varanasi (वाराणसी), Prayagraj (प्रयागराज) और Azamgarh (आजमगढ़) जैसे क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका बनी हुई है। इससे दिन और रात दोनों समय तापमान अधिक रहने की संभावना है।

बारिश की पूरी भरपाई मुश्किल:
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगस्त के शुरुआती दिनों में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से वर्षा की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है, लेकिन पूरे सीजन की भरपाई होना कठिन माना जा रहा है। विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में वर्षा की 34 प्रतिशत कमी खरीफ फसलों, खासकर धान की खेती के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

#Tags: #UttarPradesh #Monsoon #IMD #Rainfall #Drought #Purvanchal #AtulKumarSingh #Weather #Agriculture

Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading