इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ (Lucknow Bench) ने प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़े मामलों को लेकर स्वतः संज्ञान याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की। न्यायालय ने राज्य सरकार के संबंधित विभागों से इस विषय में सभी आवश्यक आंकड़े और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि गुमशुदा व्यक्तियों से संबंधित सूचनाओं और उन पर की गई कार्रवाई का समुचित विवरण न्यायालय के समक्ष रखा जाना आवश्यक है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित की गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थिति के आदेश:
न्यायालय ने इस मामले में अपर मुख्य सचिव गृह (Additional Chief Secretary Home) और पुलिस महानिदेशक (Director General of Police) को सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि उच्च स्तर के अधिकारियों की उपस्थिति से मामले की वास्तविक स्थिति और अब तक की गई कार्रवाई पर स्पष्ट जानकारी प्राप्त हो सकेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय (Justice Rajan Roy) और न्यायमूर्ति एके चौधरी (Justice A.K. Chaudhary) की खंडपीठ ने पारित किया।
युवक की गुमशुदगी से सामने आया मामला:
यह पूरा मामला चिनहट (Chinhat) क्षेत्र निवासी विक्रमा प्रसाद द्वारा दी गई जानकारी के बाद सामने आया। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि उनका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था। इस संबंध में चिनहट थाना (Chinhat Police Station) में गुमशुदगी की सूचना भी दर्ज कराई गई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस स्तर पर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। लंबे समय तक कोई प्रगति न होने से परेशान होकर याची ने न्यायालय का रुख किया।
राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब:
याची की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने न केवल संबंधित मामले में की गई कार्रवाई का विवरण मांगा, बल्कि प्रदेश भर में गुमशुदा हुए व्यक्तियों के संबंध में विस्तृत आंकड़े उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। आदेश के अनुपालन में अपर मुख्य सचिव गृह द्वारा एक शपथपत्र दाखिल किया गया, जिसमें पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी दी गई।
आंकड़ों ने बढ़ाई न्यायालय की चिंता:
शपथपत्र के अनुसार 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच पुलिस के समक्ष कुल 1,08,300 लोगों के लापता होने की सूचनाएं दर्ज हुईं। इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही पता लगाया जा सका है। न्यायालय ने इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में की जा रही कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अधिकारियों के कार्य पर असंतोष:
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रस्तुत आंकड़े यह दर्शाते हैं कि संबंधित अधिकारियों का कार्य संतोषजनक नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर लोगों के लापता होने और उनमें से बहुत कम मामलों का समाधान होना एक गंभीर स्थिति को उजागर करता है। न्यायालय ने इसे आम नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश:
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने इस मामले को प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया। इसी जनहित याचिका के तहत वर्तमान में सुनवाई की गई है। कोर्ट ने संकेत दिया कि भविष्य की सुनवाइयों में इस मुद्दे पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से और भी विस्तृत जवाब मांगा जा सकता है।
#Allahabad #HighCourt #Lucknow #MissingPersons #Police #UP
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।

