लखनऊ (Lucknow)। प्रदेश में पशुपालन व्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की योजनाओं के तहत प्रदेश के सभी ब्लॉकों पर पशुओं के उपचार के लिए पशुधन औषधि केंद्र खोले जाने की तैयारी है। इन केंद्रों पर आधुनिक दवाओं के साथ-साथ पारंपरिक उपचार पद्धति के रूप में एथनोमेडिसिन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना और पशुपालकों को समय पर उपचार की सुविधा देना है।

सभी ब्लॉकों पर खुलेंगे पशुधन औषधि केंद्र:
पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह (Dharm Pal Singh) ने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में पशुधन औषधि केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से गोवंश सहित अन्य पशुओं के उपचार की बेहतर व्यवस्था होगी। पशुओं में फैलने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए वैक्सीन और आवश्यक औषधियों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे पशुधन की मृत्यु दर में कमी लाई जा सके।
एथनोमेडिसिन से मिलेगा पारंपरिक ज्ञान का लाभ:
औषधि केंद्रों पर एथनोमेडिसिन की व्यवस्था किए जाने से पशुपालकों को पारंपरिक और स्थानीय ज्ञान पर आधारित उपचार का लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित उपचार पद्धतियों को वैज्ञानिक ढांचे में शामिल कर पशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
पीपीपी मोड पर वेटनरी और पैरावेटनरी सेवाएं:
गोवंश और अन्य पशुओं के इलाज के लिए पीपीपी मोड पर वेटनरी और पैरावेटनरी सेवाएं शुरू की जाएंगी। इसके तहत निजी भागीदारी से उपचार, परामर्श और प्राथमिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पशुओं की जांच के लिए पैथालॉजी केंद्र और पॉलीक्लिनिक केंद्रों की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिससे गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान हो सके।
किसानों को मिलेगा मुफ्त चारा बीज:
पशुपालकों की सुविधा और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से नई चारा नीति लागू की गई है। इसके अंतर्गत किसानों को चारा उगाने के लिए चारे का बीज निशुल्क दिया जाएगा। इससे हरे चारे की उपलब्धता बढ़ेगी और दुग्ध उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
बजट में उल्लेखनीय वृद्धि से योजनाओं को बल:
पशुपालकों को अनुदानित योजनाओं का लाभ देने के लिए विभागीय बजट में लगातार वृद्धि की गई है। वर्ष 2021-22 में जहां अनुदानित योजनाओं के लिए 6.02 करोड़ रुपये का प्रावधान था, वहीं वर्ष 2025-26 में इसे बढ़ाकर 22.45 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे बकरी, भेड़, सूकर और बैकयार्ड कुक्कुट पालन जैसी लाभार्थीपरक योजनाओं को गति मिलेगी।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में पशुधन क्षेत्र का योगदान:
धर्मपाल सिंह (Dharm Pal Singh) ने कहा कि उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और पशुपालन पर आधारित है। प्रदेश की लगभग 68 प्रतिशत आबादी अपनी आजीविका के लिए इन क्षेत्रों पर निर्भर है। पशुधन क्षेत्र राज्य के प्राथमिक सकल घरेलू उत्पाद में महत्वपूर्ण योगदान देता है। पशुजन्य उत्पादों का सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 में 0.99 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
दुग्ध, अंडा और ऊन उत्पादन में निरंतर वृद्धि:
प्रदेश देश के दुग्ध उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और कुल उत्पादन में 15.66 प्रतिशत का योगदान देता है। दुग्ध उत्पादन वर्ष 2017-18 में 290.52 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 388.15 लाख मीट्रिक टन हो गया है। अंडा उत्पादन भी इसी अवधि में 244 करोड़ से बढ़कर 611 करोड़ तक पहुंच गया है। वर्ष 2025-26 के लिए दुग्ध, अंडा और ऊन उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
मोबाइल वेटनरी यूनिट और गोवंश संरक्षण:
पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए 520 मोबाइल वेटनरी यूनिट टोल फ्री नंबर 1962 के माध्यम से पशुपालकों के द्वार तक सेवाएं दी जा रही हैं। इसके साथ ही निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति के तहत गो आश्रय स्थलों का विस्तार किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में गोवंश का संरक्षण संभव हुआ है।
पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रयास:
अनुदानित योजनाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों के माध्यम से पशुपालकों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य पशुधन स्वास्थ्य, सुरक्षा और उत्पादकता में सुधार कर पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
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