प्रदेश के 41 मेडिकल कॉलेजों में स्थापित की जाएगी आधुनिक कैथ लैब, सुधरेगा कार्डियक केयर का स्तर

रिपोर्टर: अनुज कुमार

लखनऊ (Lucknow) में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश में हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर योजना तैयार की गई है। इसके तहत प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं से लैस कैथ लैब खोलने की तैयारी की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हार्ट अटैक और अन्य गंभीर हृदय रोगों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े और उन्हें अपने ही जिले या आसपास के क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधा मिल सके।

प्रदेश के 41 मेडिकल कॉलेजों में कैथ लैब की योजना:
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कुल 41 मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक कैथ लैब खोलने की योजना बनाई गई है। कैथ लैब की स्थापना से कार्डियक केयर सेवाएं प्रदेश के हर कोने तक पहुंच सकेंगी। फिलहाल प्रदेश के केवल 10 मेडिकल कॉलेजों में कैथ लैब की सुविधा उपलब्ध है, जिससे सीमित क्षेत्रों के मरीजों को ही इसका लाभ मिल पा रहा है। नई योजना के लागू होने से हृदय रोगियों को समय पर जांच, एंजियोग्राफी और जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

हृदय रोगियों को समय पर जांच और इलाज:
कैथ लैब खुलने से हृदय रोग से पीड़ित मरीजों को तुरंत जांच और इलाज की सुविधा मिल सकेगी। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। इस योजना के जरिए ऐसे जोखिम को कम करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की मंशा है कि हृदय रोग से होने वाली जटिलताओं को कम किया जाए और मरीजों को त्वरित चिकित्सा सहायता मिले।

स्टेमी केयर योजना से जुड़े जिले:
स्टेमी केयर योजना के तहत अब तक उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के 55 जिलों के अस्पतालों को जोड़ा जा चुका है। इस योजना के माध्यम से हार्ट अटैक के गंभीर मामलों में मरीजों को तुरंत विशेषज्ञ सलाह और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इस नेटवर्क के जरिए जिला स्तर के अस्पतालों को उच्च चिकित्सा संस्थानों से जोड़ा गया है, जिससे गंभीर मरीजों को समय रहते उचित दिशा में इलाज मिल सके।

केजीएमयू और लोहिया संस्थान की अहम भूमिका:
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) और राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान (RML Institute) को इस योजना का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। इन दोनों संस्थानों से प्रदेश के विभिन्न जिला स्तरीय अस्पतालों को जोड़ा गया है। इसके जरिए हार्ट अटैक के गंभीर मरीजों को विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर उन्नत चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर किया जा रहा है।

अगले चरण में 20 जिलों के कॉलेज होंगे शामिल:
योजना के अगले चरण में मेरठ (Meerut), गोरखपुर (Gorakhpur) सहित 20 जिलों के मेडिकल कॉलेजों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को भी कैथ लैब की सुविधा मिल सकेगी। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी और हर जिले में कार्डियक केयर की पहुंच बेहतर होगी।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से इलाज:
इस योजना के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से हृदय रोगियों का इलाज किया जा रहा है। गंभीर मामलों में मरीजों को समय पर रेफर कर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर हस्तक्षेप से हार्ट अटैक से होने वाली जटिलताओं और मौतों में कमी लाई जा सकती है।

कार्डियक केयर नेटवर्क होगा मजबूत:
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस पहल से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में कार्डियक केयर नेटवर्क और मजबूत होगा। कैथ लैब और स्टेमी केयर योजना के विस्तार से हृदय रोगियों को एक संगठित और प्रभावी इलाज प्रणाली का लाभ मिलेगा। इससे न केवल इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को कम करने में भी मदद मिलेगी।

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