UP: तीन साल में 12 हजार करोड़ की चोरी… शेल फर्म बनाकर आईटीसी खपाने वाले सिंडिकेट पर कार्रवाई तेज

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फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के जरिए वस्तु एवं सेवा कर की चोरी करने वालों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में कार्रवाई तेज हुई है। वित्त मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में रखे गए आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान 1,356 मामलों में 12,015 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का पता लगाया गया। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

तीन साल में 12 हजार करोड़ की फर्जी आईटीसी पकड़ी:

आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच उत्तर प्रदेश में फर्जी आईटीसी से जुड़ी कार्रवाई में लगातार बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2023-24 में 271 मामलों में 2,113 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई थी। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में फर्जी आईटीसी से जुड़ी रकम बढ़कर 5,149.69 करोड़ रुपये हो गई।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 637 मामलों में 4,751 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी पकड़ी गई। इस तरह तीन वित्तीय वर्षों में मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, फर्जी आईटीसी के मामलों में कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ा है।

देशभर में 1.69 लाख करोड़ से अधिक की आईटीसी पकड़ी:

वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में पिछले तीन वर्षों के दौरान 1.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी आईटीसी का पता लगाया गया। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 7.07 प्रतिशत रही।

प्रदेश में फर्जी आईटीसी के मामलों की बढ़ती संख्या के साथ प्रवर्तन कार्रवाई भी तेज हुई है। विभाग की ओर से मामलों की जांच के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की गई है।

गिरफ्तारी के आंकड़ों में भी हुआ इजाफा:

उत्तर प्रदेश में फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी का आंकड़ा भी तीन वर्षों में बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 2024-25 में गिरफ्तारी की संख्या बढ़कर 19 हो गई।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इस तरह तीन वित्तीय वर्षों में कुल 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया। आंकड़ों से स्पष्ट है कि फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों में प्रवर्तन कार्रवाई लगातार सख्त हुई है।

फर्जी पैन-आधार से तैयार हो रहीं कागजी कंपनियां:

फर्जी आईटीसी के नेटवर्क में जाली या चोरी किए गए पैन और आधार का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण हासिल करने के मामले भी सामने आए हैं। इसके बाद कागजों पर कंपनियां खड़ी कर इनके जरिए कर संबंधी अनियमितताओं को अंजाम देने की बात सामने आई है।

ऐसे मामलों में कई अलग-अलग कारोबारी क्षेत्रों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। लोहा-इस्पात, कपड़ा, प्लास्टिक, कागज, प्लाईवुड, सीमेंट और तांबा जैसे क्षेत्रों से जुड़े मामलों में फर्जी आईटीसी के नेटवर्क का पता चला है।

सेवा क्षेत्र भी फर्जी आईटीसी के दायरे में:

फर्जी आईटीसी से जुड़े मामले केवल वस्तुओं के कारोबार तक सीमित नहीं हैं। सेवाओं से संबंधित क्षेत्रों में भी ऐसे मामलों की जानकारी सामने आई है। इनमें वर्क कॉन्ट्रैक्ट, मैनपावर सप्लाई और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इन क्षेत्रों से जुड़े मामलों में फर्जी आईटीसी के जरिए कर संबंधी अनियमितताओं की बात सामने आई है। इसके चलते कर विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई का दायरा विभिन्न कारोबारी और सेवा क्षेत्रों तक पहुंचा है।

विशेषज्ञ ने संगठित सिंडिकेट बढ़ने की बात कही:

आर्थिक अपराध विशेषज्ञ देवेंद्र डंग के अनुसार, फर्जी आईटीसी के बढ़ते मामलों का पता चलना इस बात की ओर संकेत करता है कि संगठित तरीके से जालसाजी करने वाला सिंडिकेट भी लगातार बढ़ा है। उनके मुताबिक, कार्रवाई के जरिए ऐसे मामलों का पता लगाने पर जोर दिया जा रहा है।

फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों में कर विभाग की सख्ती को न्यायपालिका का भी समर्थन मिलने की बात कही गई है। न्यायालय ने ऐसे मामलों को केवल कर चोरी तक सीमित नहीं माना और आर्थिक अपराधों को गंभीर श्रेणी में रखा है। न्यायालय के अनुसार, ऐसे मामलों में सामान्य अपराधों की तरह उदारता नहीं बरती जा सकती।

आर्थिक अपराधों पर सख्त रुख:

फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों में सामने आए न्यायिक रुख के अनुसार, आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, न्यायालय ने ऐसे घोटालों को देश की आर्थिक संप्रभुता पर असर डालने वाला बताया है।

उत्तर प्रदेश में पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि फर्जी आईटीसी से जुड़े मामलों की पहचान और उन पर कार्रवाई दोनों में बढ़ोतरी हुई है। गिरफ्तारी के आंकड़े भी इसी अवधि में लगातार बढ़े हैं।

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