यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत फ्यूल एवं पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPCA) को लेकर बड़ी राहत मिल सकती है। यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने यूपीपीसीएल (UPPCL) से इस बढ़ोतरी पर सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सरचार्ज की गणना किस आधार पर की गई और क्या इसमें दो वर्ष पुराना बकाया जोड़ना नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी दी जाए। इस आदेश के बाद प्रदेश में बिजली बिलों को लेकर चल रही बहस और तेज हो गई है।
आयोग की सख्त पूछताछ:
यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने यूपीपीसीएल (UPPCL) से सवाल किया है कि 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज की गणना का आधार क्या है और इसमें दो साल पुराने लगभग 1400 करोड़ रुपये के बकाया को किस नियम के तहत शामिल किया गया। आयोग का कहना है कि नियमानुसार फ्यूल सरचार्ज केवल पिछले दो महीने की बिजली खरीद लागत के अंतर के आधार पर तय किया जा सकता है, न कि पुराने बकाए को जोड़कर।
उपभोक्ता परिषद की आपत्ति:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद (UP State Electricity Consumer Council) के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस वृद्धि को जनहित के खिलाफ बताते हुए यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में प्रत्यावेदन दाखिल किया था। परिषद का कहना है कि यूपीपीसीएल (UPPCL) ने नियमों की अनदेखी करते हुए पुराने बकाए और अन्य देनदारियों को जोड़कर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला है, जो कानूनी रूप से गलत है।
बिजली बिल पर संभावित असर:
यदि यूपीपीसीएल (UPPCL) 10 प्रतिशत फ्यूल सरचार्ज को सही साबित करने में असफल रहता है, तो उपभोक्ताओं पर केवल लगभग 2 प्रतिशत FPPCA लागू होने की संभावना है। इसका अर्थ है कि 100 रुपये के बिजली बिल पर मात्र 2 रुपये की बढ़ोतरी होगी। उपभोक्ता परिषद का दावा है कि यदि सही गणना की जाए तो जून 2026 में उपभोक्ताओं को राहत मिलनी चाहिए थी, न कि अतिरिक्त भार।
लागत और गणना पर विवाद:
परिषद ने यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) को बताया कि मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत और यूपीपीसीएल (UPPCL) द्वारा दर्शाई गई लागत में बड़ा अंतर है। आयोग द्वारा स्वीकृत दर लगभग 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी, जबकि 5.86 रुपये प्रति यूनिट दर्शाकर उपभोक्ताओं पर करीब 1610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया। इसमें एनटीपीसी (NTPC) और अन्य देनदारियों को भी शामिल करने का आरोप है।
आदेश और प्रतिक्रिया:
30 मई को यूपीपीसीएल (UPPCL) ने 10 प्रतिशत फ्यूल एवं पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज लागू करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश के बाद उपभोक्ताओं में नाराजगी देखी गई और इसे तुरंत वापस लेने की मांग उठी। वहीं, यूपीपीसीएल (UPPCL) का तर्क है कि पिछले लगभग छह वर्षों से मूल बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है और यह सरचार्ज केवल वास्तविक लागत समायोजन के लिए अस्थायी व्यवस्था है।
जांच की मांग और आगे की प्रक्रिया:
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद (UP State Electricity Consumer Council) ने मांग की है कि मार्च 2026 में महंगी बिजली की खरीद किन परिस्थितियों में की गई और किन कंपनियों से की गई, इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। परिषद का आरोप है कि निजी बिजली उत्पादकों से अधिक दरों पर बिजली खरीदकर उपभोक्ताओं पर अनावश्यक भार डाला गया है।
इस पूरे मामले में यूपी विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने यूपीपीसीएल (UPPCL) से सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब कर स्पष्ट किया है कि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उपभोक्ताओं को राहत दी जा सकती है। मामले पर प्रदेशभर में निगाहें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका सीधा असर बिजली बिलों पर पड़ने वाला है।
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