उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम सामने आया है। प्रत्येक जिले में सुव्यवस्थित भर्ती एवं रोजगार केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव अब राज्य की नीति और बजटीय प्रावधान का हिस्सा बन चुका है। इस पहल को लेकर डॉ. Rajeshwar Singh (राजेश्वर सिंह) ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) को पत्र लिखकर सुझाव दिया था, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर ठोस रूप दिया है।

सुझाव से नीति तक की यात्रा:
डॉ. Rajeshwar Singh (राजेश्वर सिंह) ने बताया कि उनके प्रस्ताव का उद्देश्य युवाओं को जिला स्तर पर ही रोजगार और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराना था। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath (योगी आदित्यनाथ) ने “सार्वजनिक अवसरों के विस्तार” पर विशेष बल देते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक ज़ोन की स्थापना की घोषणा की। यह मॉडल प्रत्येक जिले में कौशल, रोजगार और औद्योगिक सुविधाओं को एकीकृत स्वरूप में विकसित करेगा। इस पहल के लिए वित्त मंत्री Suresh Khanna (सुरेश खन्ना) की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है।
बजट 2026-27 में रोजगार पर फोकस:
राज्य सरकार ने Budget 2026-27 (बजट 2026-27) में रोजगार को प्राथमिकता देते हुए कई अहम लक्ष्य निर्धारित किए हैं। लगभग 10 लाख रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही 1.5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग और सहायता उपलब्ध कराने की भी योजना है। इसके अतिरिक्त MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम), स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी मिशन में निवेश बढ़ाने की घोषणा की गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर उद्योग और स्वरोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।

₹575 करोड़ का बजटीय प्रावधान:
सरदार पटेल रोजगार एवं औद्योगिक ज़ोन के लिए ₹575 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग जिला स्तर पर एकीकृत ढांचा विकसित करने में किया जाएगा। इसका उद्देश्य कौशल विकास को सीधे रोजगार से जोड़ना है, ताकि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को अवसरों के लिए भटकना न पड़े। एक ही परिसर में उद्योग, उद्यमिता और स्वरोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। यह मॉडल युवाओं को अपने ही जिले में “वन-स्टॉप समाधान” प्रदान करेगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती:
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पलायन को रोकना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। जिला स्तर पर रोजगार और उद्योग के अवसर मिलने से युवाओं को अन्य शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। इससे स्थानीय बाजार, सेवा क्षेत्र और उत्पादन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम प्रदेश में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा और युवाओं को प्रशिक्षित, सक्षम तथा रोजगार-योग्य बनाएगा।
यह पहल केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि युवाओं के लिए अवसरों के विस्तार का ठोस खाका मानी जा रही है। जिला-स्तर पर संगठित ढांचे के माध्यम से कौशल, रोजगार और उद्योग को जोड़ने का प्रयास प्रदेश की विकास नीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
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