डिजिटल अरेस्ट, न्यूड वीडियो कॉल… साइबर फ्रॉड के 4 हथियार:UP में हर महीने ₹100 करोड़ से ज्यादा की ठगी; ढाई लाख शिकायतें, FIR 1% भी नहीं
उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार, बीते सात महीनों में प्रदेश में ढाई लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से केवल 1,040 मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई, जबकि पुलिस 1,957 आरोपियों को गिरफ्तार कर सकी। इसी अवधि में साइबर ठगी के जरिए लोगों से 720 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगी गई। कार्रवाई के दौरान 242 करोड़ रुपये खातों में रोक दिए गए, लेकिन 478 करोड़ रुपये की रकम ठगों तक पहुंच गई।
साइबर ठगी करने वाले अब केवल मोबाइल या कंप्यूटर को निशाना बनाने तक सीमित नहीं हैं। वे लोगों के डर, लालच, रिश्तों और भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर ठगी कर रहे हैं। पढ़े-लिखे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को अलग-अलग तरीकों से जाल में फंसाया जा रहा है।
डर दिखाकर की जा रही बड़ी रकम की ठगी:
साइबर अपराध में एक तरीका ऐसा भी है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। पीड़ित को बताया जाता है कि उसके नाम से कोई अपराध हुआ है या उसके दस्तावेज और मोबाइल कनेक्शन किसी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल हुए हैं।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या भले ही कम है, लेकिन सात महीनों में ठगी गई कुल रकम में करीब 23 प्रतिशत हिस्सा इसी तरीके से जुड़ा है।
जुलाई में लखनऊ के एक बुजुर्ग दंपती के साथ भी इसी तरह ठगी की गई। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताया और दावा किया कि दंपती के नाम पर जारी सिम का इस्तेमाल कश्मीर में आतंकी गतिविधियों और धनशोधन में हुआ है।
डर के कारण दंपती ने खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया। ठग वीडियो कॉल के जरिए लगातार उन्हें निर्देश देते रहे। उनके सोने, जागने और खाने-पीने तक पर नजर रखी गई। इसके बाद दंपती ने अपनी जमा पूंजी और सावधि जमा तक तुड़वा दी और करीब 70 लाख रुपये ठगों के खातों में भेज दिए।
फोन कॉल और संदेशों के जरिए भी जाल:
साइबर ठगी के कई मामलों में फोन कॉल या सामाजिक माध्यमों पर भेजे गए संदेशों का सहारा लिया जाता है। पीड़ित को अलग-अलग बहाने से भुगतान करने के लिए तैयार किया जाता है और कई मामलों में एकीकृत भुगतान प्रणाली के जरिए रकम ट्रांसफर करा ली जाती है।
उत्तर प्रदेश में सामने आने वाले साइबर ठगी के मामलों में करीब 32 प्रतिशत मामले इसी तरीके से जुड़े बताए गए हैं। ठग बातचीत के दौरान इतना दबाव बनाते हैं कि पीड़ित को किसी से सलाह लेने या पूरी जानकारी जांचने का समय नहीं मिल पाता।
शेयर बाजार में मुनाफे का लालच देकर ठगी:
16 अगस्त को कानपुर से सामने आए मामले में राजाराम शाक्यवार को सामाजिक माध्यमों के एक समूह में जोड़ा गया। यहां उन्हें शेयर बाजार में निवेश के जरिए मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। ठगों ने खुद को एक पंजीकृत सुरक्षा कंपनी से जुड़ा बताया।
शुरुआत में शेयर बाजार से संबंधित जानकारियां भेजकर भरोसा कायम किया गया। इसके बाद प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम और अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम में निवेश के नाम पर करीब साढ़े छह लाख रुपये जमा करा लिए गए।
जब राजाराम ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने और पैसे जमा करने के लिए कहा। इसके बाद उन्हें ठगी का पता चला और उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत की। कल्याणपुर पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, वेबसाइट और रकम के लेन-देन की जांच कर रही है।
इस तरह के मामलों में करीब 9 से 10 प्रतिशत साइबर ठगी होने की बात सामने आई है। बदनामी के डर से कई लोग शिकायत करने से भी बचते हैं।
वीडियो कॉल के जरिए बदनामी का डर दिखाया:
मैनपुरी के भोगांव कस्बे में रहने वाले एक सेवानिवृत्त दरोगा के साथ भी साइबर ठगी का मामला सामने आया था। छह अप्रैल को उनके वॉट्सऐप पर एक युवती की कॉल आई। उसने खुद को रिश्तेदार बताया। इसके बाद वीडियो कॉल की गई और कुछ समय बाद युवती ने दोबारा संपर्क किया।
युवती ने अपनी मां की बीमारी का हवाला देकर एक लाख रुपये मांगे। साथ ही पैसे नहीं देने पर वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी दी। अगले दिन सेवानिवृत्त दरोगा को एक संपादित वीडियो भेजा गया, जिसमें उन्हें आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया था।
बदनामी के डर से उन्होंने ठगों के बताए बैंक खाते में करीब 3.47 लाख रुपये भेज दिए। इस तरह ठगों ने सामाजिक प्रतिष्ठा और डर का फायदा उठाकर रकम हासिल कर ली।
व्हाट्सऐप खाता हैक कर परिचितों से मांगे पैसे:
मेरठ में यूपी महिला आयोग की सदस्य डॉ. हिमानी अग्रवाल का जून में वॉट्सऐप खाता कथित तौर पर हैक हो गया था। इसके बाद ठगों ने उनकी संपर्क सूची में मौजूद पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों और अन्य लोगों को संदेश भेजने शुरू कर दिए।
संदेशों में खुद को डॉ. हिमानी अग्रवाल बताते हुए 45 हजार, 50 हजार और 52 हजार रुपये तक मांगे गए। कुछ लोगों ने रकम भेज भी दी। बाद में परिचितों ने डॉ. हिमानी को फोन कर पैसे मांगने की जानकारी दी, जिसके बाद मामले का पता चला।
इस तरह के मामले उत्तर प्रदेश में करीब पांच प्रतिशत बताए गए हैं। कई बार लोग संबंधित व्यक्ति को फोन करके पुष्टि कर लेते हैं और ठगी से बच जाते हैं।
जल्दबाजी में फैसला करवाना ठगों की रणनीति:
यूपी पुलिस को साइबर तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन के अनुसार, ठगी का तरीका कोई भी हो, ठग सबसे पहले पीड़ित पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं। उन्हें बताया जाता है कि कुछ ही मिनट में भुगतान नहीं किया तो मामला दर्ज हो जाएगा, पार्सल जब्त कर लिया जाएगा या बैंक खाता बंद कर दिया जाएगा।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति परिवार या संबंधित विभाग से जानकारी लेने के बजाय दबाव में फैसला कर लेता है। ठग इसी घबराहट का फायदा उठाते हैं।
साइबर ठगी होने पर तुरंत कार्रवाई करने की सलाह दी गई है। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जल्द शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।
गेमिंग के जरिए बच्चों को बनाया जा रहा निशाना:
ऑनलाइन खेलों में मुफ्त सिक्के, पुरस्कार या नए पात्र खोलने का लालच देकर बच्चों को ठगी के जाल में फंसाया जाता है। उन्हें खेल डाउनलोड करने या किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है।
कई बार बच्चे माता-पिता के फोन पर आए पासवर्ड या ओटीपी भी साझा कर देते हैं। इसके बाद ठग बैंक खाते से रकम निकाल सकते हैं।
फर्जी एपीके से मोबाइल पर कब्जे की कोशिश:
ठग वॉट्सऐप या एसएमएस के जरिए शादी का कार्ड, चालान अपडेट या गोपनीय जानकारी के नाम पर एपीके फाइल भेजते हैं। इसे डाउनलोड और स्थापित करने के बाद फोन में हानिकारक सॉफ्टवेयर पहुंच सकता है।
इसके जरिए ठग फोन से जुड़ी जरूरी जानकारी हासिल करने और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं।
फर्जी निवेश योजनाओं में बड़े मुनाफे का लालच:
टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर फर्जी समूह बनाकर शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी में भारी मुनाफे का दावा भी किया जाता है। कई बार 500 प्रतिशत तक लाभ का लालच दिया जाता है।
शुरुआत में फर्जी खाते या अनुप्रयोग पर लाभ दिखाकर भरोसा कायम किया जाता है। इसके बाद अधिक रकम लगाने के लिए दबाव बनाया जाता है। जल्दी कमाई की चाह रखने वाले युवा भी ऐसे जाल में फंसकर अपनी जमा पूंजी गंवा सकते हैं।
Disclaimer:
यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है। यदि कोई आपत्ति है या खबर से संबंधित कोई सूचना देने या अपना पक्ष रखने के लिए हमें ईमेल करें: apnabharattimes@gmail.com।
#Tags: #UttarPradesh #CyberFraud #NCRP #CyberCrime #DigitalArrest #OnlineFraud