आज से शुरू होगी जनगणना, पूछे जाएंगे ये 33 सवाल, गलत जानकारी देने पर लगेगा इतना जुर्माना

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में जनगणना-2027 का पहला चरण आज से शुरू हो गया है। यह प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक पूरी की जाएगी। इस दौरान 22 मई से 21 जून के बीच जनगणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्र करेंगे। इस बार करीब 33 सवालों के जरिए परिवार और मकान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां ली जाएंगी। साथ ही, 7 मई से राज्य के लोग ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी अपनी जानकारी स्वयं भर सकेंगे।

दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया:
जनगणना का पहला चरण हाउस लिस्टिंग और हाउस सेंसेस के रूप में संचालित किया जा रहा है, जो सितंबर 2026 तक चलेगा। इसके बाद दूसरा चरण फरवरी 2027 से शुरू होगा। खास बात यह है कि आजादी के बाद पहली बार देश में जातिगत जनगणना भी की जा रही है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों का विस्तृत डेटा सामने आएगा।

जनगणना से क्या होगा फायदा:
जनगणना का असर सीधे तौर पर लोगों के जीवन पर पड़ता है। इससे सरकार को यह जानकारी मिलती है कि किस क्षेत्र में कितनी आबादी और किन वर्गों के लोग रहते हैं। इसी आधार पर राशन, आवास, पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा सड़कों, अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों की योजना बनाने में भी जनगणना के आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं। विधानसभा और लोकसभा सीटों का परिसीमन भी इसी डेटा पर आधारित होता है।

जनगणनाकर्मी क्या पूछ सकते हैं और क्या नहीं:
जनगणना के दौरान मकान की स्थिति, बिजली-पानी, शौचालय, वाहन, टीवी और इंटरनेट जैसी सुविधाओं से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। हालांकि कुछ निजी जानकारियां पूछना पूरी तरह प्रतिबंधित है। जैसे मासिक आय, बैंक बैलेंस, आधार या पैन कार्ड दिखाने का दबाव, बैंक अकाउंट नंबर या ओटीपी जैसी जानकारी जनगणनाकर्मी नहीं मांग सकते।

दस्तावेज दिखाने की नहीं होगी जरूरत:
जनगणना में भाग लेने के लिए किसी भी प्रकार के दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या नागरिकता से जुड़े कागजात दिखाने की आवश्यकता नहीं है। न ही मकान, जमीन या बैंक खाते से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह जानकारी आधारित है, जिसमें लोगों की सुविधा का ध्यान रखा गया है।

गलत जानकारी देने पर हो सकती है कार्रवाई:
जनगणना में शामिल न होना या गलत जानकारी देना कानूनन अपराध है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सभी नागरिकों को सही जानकारी देना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है, जो एक हजार रुपए तक हो सकता है।

निजी जानकारी रहेगी पूरी तरह सुरक्षित:
जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी जानकारियां गोपनीय रखी जाती हैं। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा-15 के तहत इन आंकड़ों को सुरक्षित रखा जाता है। डेटा को एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा के माध्यम से सरकारी सर्वरों में संग्रहित किया जाता है, जिसका उपयोग केवल नीतियां और योजनाएं बनाने के लिए किया जाता है।

दो तरीकों से कर सकते हैं भागीदारी:
जनगणना में भाग लेने के दो विकल्प दिए गए हैं। पहला, जनगणनाकर्मी आपके घर आकर जानकारी दर्ज करेंगे। दूसरा, सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल के माध्यम से आप खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। ऑनलाइन जानकारी भरने के बाद एक आईडी मिलेगी, जिसे जनगणनाकर्मी के आने पर दिखाना होगा।

किराएदार भी होंगे शामिल:
जो लोग किराए के मकान में रहते हैं, वे भी जनगणना से बाहर नहीं रहेंगे। उन्हें अपने निवास की स्थिति के अनुसार जानकारी देनी होगी। चाहे वे कहीं और घर के मालिक हों या पूरी तरह किराए पर रह रहे हों, दोनों स्थितियों के लिए अलग विकल्प दिए जाएंगे।

ऑनलाइन प्रक्रिया में भाषा की सुविधा:
पोर्टल पर हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 क्षेत्रीय भाषाओं का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इससे हर वर्ग के लोग अपनी सुविधा के अनुसार भाषा चुनकर जानकारी भर सकेंगे। यदि ऑनलाइन प्रक्रिया में कोई त्रुटि हो जाती है, तो फाइनल सबमिशन से पहले उसे सुधारा जा सकता है।

जनगणनाकर्मी के आने पर क्या करें:
जब जनगणनाकर्मी आपके घर आएं, तो उन्हें घर में प्रवेश की अनुमति देना जरूरी है। साथ ही, घर के दरवाजे या दीवार पर नंबर लिखने देना होगा और सभी जानकारी सही-सही उपलब्ध करानी होगी।

Disclaimer:
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