योगी सरकार 2.0 का पांचवां बजट फरवरी में पेश किया जाना है। इस बजट को विधानसभा चुनाव 2027 की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। सरकार की तैयारी एक करोड़ से अधिक महिलाओं और सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों को राहत देने की है। बजट में वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन, विधवा पेंशन के साथ-साथ आशा कार्यकर्ताओं और शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इससे सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर सरकार की रणनीति को मजबूती मिलने की उम्मीद की जा रही है।
चुनावी दृष्टि से अहम माना जा रहा बजट:
राजनीतिक जानकारों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बजट विधानसभा चुनाव 2027 से पहले एक बड़े वोटबैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। महिला वोटर और योजनाओं की लाभार्थी न केवल मतदान में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, बल्कि गांव-गांव और गली-गली में माहौल बनाने में भी प्रभावी मानी जाती हैं। इसी कारण बजट में महिलाओं और सामाजिक वर्गों से जुड़ी योजनाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
दो दिनों के घटनाक्रम से मिले संकेत:
पिछले दो दिनों के राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर डालें तो आगामी चुनाव की तैयारी साफ दिखाई देती है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने उत्तर प्रदेश दिवस कार्यक्रम के मंच से विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संदेश दिया। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (Nitin Navin) ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा (Mathura) में पार्टी कार्यकर्ताओं को 2027 के लिए पूरी ताकत से जुटने का आह्वान किया। इन बयानों से यह संकेत मिला कि पार्टी और सरकार दोनों का लक्ष्य आगामी चुनाव में मजबूत बढ़त बनाना है।

सीएम योगी के सामने बड़ी चुनौती:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के सामने 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की चुनौती है। वर्ष 2017, 2019 और 2022 में भारतीय जनता पार्टी को मिली सफलता में महिला वोटबैंक का योगदान अहम माना गया था। इसी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए अब एक बार फिर महिलाओं और सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों पर फोकस किया जा रहा है।
अन्य राज्यों का अनुभव बना आधार:
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने हरियाणा (Haryana), महाराष्ट्र (Maharashtra), दिल्ली (Delhi) और बिहार (Bihar) जैसे राज्यों में महिला वोटबैंक को केंद्र में रखकर योजनाओं और सौगातों के जरिए सरकार बनाने का अनुभव किया है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में भी महिला वोटर और योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को प्राथमिकता देने की तैयारी की जा रही है।
पेंशन और मानदेय बढ़ाने पर मंथन:
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) और वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार (Deepak Kumar) के बीच विभिन्न पेंशन योजनाओं को लेकर गहन मंथन हुआ है। वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन और दिव्यांग पेंशन की राशि बढ़ाने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसके साथ ही आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि और शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि को लेकर भी सकारात्मक रुख सामने आया है।
वित्त विभाग ने शुरू की बजट तैयारी:
इन योजनाओं पर सहमति बनने के बाद वित्त विभाग ने पेंशन और मानदेय बढ़ाने को लेकर बजट की तैयारी शुरू कर दी है। बजट में कितनी राशि आवंटित की जाएगी और इसका दायरा कितना होगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
1.47 लाख शिक्षामित्रों को मिल सकती है राहत:
सरकार करीब नौ साल बाद शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। प्रदेश में लगभग 1.47 लाख शिक्षामित्र और 28 हजार से अधिक अनुदेशक कार्यरत हैं। इन सभी के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। फिलहाल यह विचार किया जा रहा है कि मानदेय में प्रति माह 2000 रुपये की बढ़ोतरी की जाए या इससे अधिक राशि दी जाए।
पुराने वादों की याद:
भाजपा ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में शिक्षामित्रों की समस्या का विधिक समाधान करने का वादा किया था। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश के चलते शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द हो गया था। उस समय सरकार ने मानदेय 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रति माह किया था। इसके बाद अब तक मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
विधायकों और मंत्रियों की मांग:
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायक समय-समय पर शिक्षामित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग उठाते रहे हैं। हाल ही में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (Sandeep Singh) ने भी एक कार्यक्रम के दौरान मानदेय बढ़ाने के संकेत दिए थे। इससे शिक्षामित्रों में उम्मीद बढ़ी है कि आगामी बजट उनके लिए राहत लेकर आ सकता है।
2027 की रणनीति में बजट की भूमिका:
कुल मिलाकर योगी सरकार 2.0 का यह बजट केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। महिला वोटर, पेंशनधारक, आशा कार्यकर्ता और शिक्षामित्र जैसे वर्गों पर केंद्रित यह बजट सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है।
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