उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म कर शरीयत कानून लागू करने की साजिश रचने वाले पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों ने “मुजाहिदीन आर्मी” नामक संगठन बनाकर देश की मौजूदा शासन प्रणाली को उखाड़ फेंकने का षड्यंत्र रचा था। एटीएस (ATS) ने आरोपियों को अदालत में पेश कर आठ दिन का पुलिस कस्टडी रिमांड (Police Custody Remand) प्राप्त किया है, ताकि पूछताछ में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकें।
एटीएस की बड़ी कार्रवाई:
एटीएस उत्तर प्रदेश (ATS Uttar Pradesh) ने 29 सितंबर 2025 को मुकदमा अपराध संख्या 13/2025 धारा 148/152 बीएनएस बाला-एटीएस लखनऊ (Lucknow) में दर्ज कर कार्रवाई शुरू की थी। जांच के दौरान कई जिलों से आरोपियों को हिरासत में लिया गया। गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में अकमल रजा, सफील सलमानी उर्फ अली रजबी, मोहम्मद तौसीफ, कासिम अली और समूह का मुखिया मोहम्मद रजा शामिल हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ साजिश:
एटीएस की जांच में सामने आया कि यह समूह हिंसात्मक जिहाद के माध्यम से लोकतांत्रिक सरकार को गिराने और शरीयत व्यवस्था लागू करने का मंसूबा रखता था। आरोपी हथियार खरीदने, संगठन के विस्तार और प्रशिक्षण के लिए नए सदस्यों की भर्ती की योजना बना रहे थे। इनके द्वारा बनाई जा रही “मुजाहिदीन आर्मी” (Mujahideen Army) का उद्देश्य था देश में वैचारिक अस्थिरता फैलाना और संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती देना।
गिरफ्तार आरोपी और उनके ठिकाने:
अकमल रजा, पुत्र मो. शराफत अली, निवासी कंकरकोला, हलियापुर, जिला सुल्तानपुर (Sultanpur)।
सफील सलमानी उर्फ अली रजवी, पुत्र मीर मोहम्मद, निवासी रॉबर्ट्सगंज, जिला सोनभद्र (Sonbhadra)।
मोहम्मद तौसीफ, पुत्र इसरार अहमद, निवासी 63ए, सुजातगंज, नई बस्ती, घाटमपुर, जिला कानपुर (Kanpur)।
कासिम अली, पुत्र बब्बू शाह, निवासी सराय कदीम, थाना खजुरिया, जिला रामपुर (Rampur)।
मोहम्मद रजा, पुत्र जाबिर अली, मूल निवासी अंडौली, जनपद फतेहपुर (Fatehpur), वर्तमान निवासी मल्लपुरम, केरल (Kerala)।
मुखिया मोहम्मद रजा की भूमिका:
इस पूरी साजिश का संचालन मोहम्मद रजा द्वारा किया जा रहा था। वह संगठन का सरगना बताया जा रहा है, जिसने देश विरोधी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। मोहम्मद रजा ने विभिन्न जिलों के युवाओं को बहकाकर अपने संगठन में शामिल करने का प्रयास किया था। एटीएस की प्रारंभिक जांच में उसके डिजिटल उपकरणों और संचार माध्यमों से कई अहम सबूत मिले हैं।
न्यायालय से मिली पुलिस कस्टडी रिमांड:
एटीएस ने गिरफ्तार सभी आरोपियों को एटीएस/एनआईए कोर्ट लखनऊ (Lucknow) में पेश किया, जहां से सात अक्टूबर 2025 से आठ दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर की गई है। इस अवधि में आरोपियों से गहन पूछताछ की जाएगी ताकि इनके नेटवर्क, फंडिंग सोर्स और संपर्क सूत्रों का खुलासा किया जा सके।
पूछताछ में और खुलासे की उम्मीद:
एटीएस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। टीम अब आरोपियों के संपर्क में रहे अन्य संदिग्धों की तलाश में जुट गई है। इसके साथ ही इनसे बरामद डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी।
निष्कर्ष:
उत्तर प्रदेश एटीएस (Uttar Pradesh ATS) की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि प्रदेश में आतंकवाद और चरमपंथ फैलाने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
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