रिपोर्टर: मोहम्मद अकरम
हमीरपुर (Hamirpur) जनपद में किसानों की समस्या एक बार फिर सामने आई है। बुंदेलखंड क्षेत्र पहले से ही सूखे की स्थिति से जूझ रहा है और ऐसे में सिंचाई व्यवस्था में लापरवाही किसानों की मुश्किलें और बढ़ा रही है। मौदहा डैम (Maudha Dam) से निकलने वाली माइनरों में समय पर पानी न पहुंचने के कारण हजारों एकड़ में लगी गेहूं की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि इस गंभीर समस्या के बारे में कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसी समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के पदाधिकारियों और किसानों ने जिलाधिकारी घनश्याम मीना (Ghanshyam Meena) को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की है।
मौदहा तहसील क्षेत्र में सिंचाई संकट गहराया:
मामला मौदहा तहसील (Maudha Tehsil) क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, जहां मौदहा डैम से निकलने वाली करगांव माइनर (Kargaon Minor) और रागौल माइनर (Ragaul Minor) में समय से पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इन माइनरों के माध्यम से क्षेत्र के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल इस समय सिंचाई के लिए पानी पर निर्भर है, लेकिन माइनरों में पानी न आने से खेतों में खड़ी फसल सूखने की स्थिति में पहुंच रही है। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की आशंका बढ़ गई है।
भारतीय किसान यूनियन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन:
किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी घनश्याम मीना (Ghanshyam Meena) से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि मौदहा डैम (Maudha Dam) से निकलने वाली करगांव माइनर (Kargaon Minor) और रागौल माइनर (Ragaul Minor) में तत्काल आवश्यकता के अनुसार पानी छोड़ा जाए, ताकि खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को बचाया जा सके। किसानों ने बताया कि फिलहाल माइनरों में नाम मात्र का पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे सिंचाई की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
पिछले वर्ष भी झेलनी पड़ी थी यही समस्या:
किसानों ने जिलाधिकारी को यह भी बताया कि पिछले वर्ष भी समय से पानी न मिलने के कारण क्षेत्र के हजारों एकड़ में लगी फसल सूख गई थी। इस बार भी यदि समय रहते सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। किसानों ने कहा कि फसल की स्थिति पहले ही कमजोर हो चुकी है और यदि अगले दो से तीन दिनों के भीतर माइनरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो खेतों में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।
जल्द समाधान की मांग:
भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के पदाधिकारियों और किसानों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि समय रहते सिंचाई की व्यवस्था ठीक कर दी जाए तो फसल को बचाया जा सकता है। किसानों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेकर जल्द आवश्यक कदम उठाएगा।
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