लखनऊ: गलगोटिया वाले कुत्ता खोज लाए’ सुनकर खिलखिलाए योगी, सदन में छिड़ी शिक्षा व्यवस्था पर बहस

लखनऊ (Lucknow) में चल रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज अंतिम दिन रहा। सत्र के दौरान सदन में शिक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने निजी स्कूल-कॉलेजों की फीस को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाने की मांग उठाई, तो वहीं विधान परिषद में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाने का मामला गूंजता रहा।

निजी शिक्षण संस्थानों की फीस पर कानून की मांग:
सदन में माता प्रसाद पांडेय ने निजी स्कूलों और कॉलेजों की बढ़ती फीस को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फीस निर्धारण के लिए एक स्पष्ट कानून बनाया जाना चाहिए, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो गलगोटिया जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इस टिप्पणी के दौरान सदन में हल्का माहौल बन गया और मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सहित कई सदस्य मुस्कराते नजर आए।

दरअसल, हाल ही में आयोजित AI समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) ने अपने स्टॉल पर एक रोबोट प्रदर्शित किया था, जिसके बारे में दावा किया गया कि उसे उनके छात्रों ने तैयार किया है। बाद में सामने आया कि वह रोबोट चीन में निर्मित था। इस मामले के बाद सरकार ने संबंधित यूनिवर्सिटी को समिट से बाहर कर दिया था।

विधान परिषद में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल:
विधान परिषद में शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी फोन नहीं उठाते और उनके कर्मचारी फोन रिसीव कर बहस करने लगते हैं। इस पर अन्य सदस्यों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन हर बार व्यस्त होने का हवाला दिया गया। जासमीर अंसारी ने बताया कि कुछ स्थानों पर जनप्रतिनिधियों को अधिकारियों के खिलाफ धरना देना पड़ा। सुरेंद्र चौधरी ने बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक से संपर्क का अनुभव साझा करते हुए कहा कि पीआरओ ने स्वयं को एमडी बताकर बात की। बाद में स्पष्ट किया गया कि सीधे बातचीत संभव नहीं है। इस पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आश्वासन दिया कि वे स्वयं अधिकारियों से बात करेंगे।

मदरसा जांच और राजनीतिक तंज:
सदन में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने आशुतोष सिन्हा के प्रश्न के उत्तर में कहा कि प्रयागराज और कुशीनगर में मदरसों में कथित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां भी शिकायतें मिलेंगी, जांच आवश्यक है।

इसी दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अखिलेश यादव पूर्व मुख्यमंत्री हैं और पूर्व मुख्यमंत्री ही रहेंगे। जब आशुतोष सिन्हा ने अखिलेश की सुरक्षा कर्मियों की सूची मांगी तो सभापति ने हल्के अंदाज में टिप्पणी की कि क्या उपस्थिति ली जाएगी।

मंत्री की अनुपस्थिति और नाराजगी:
भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के सवाल का जवाब देने के दौरान संबंधित मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। सभापति ने दो बार उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का नाम पुकारा। मंत्री की अनुपस्थिति में केशव प्रसाद मौर्य ने लिखित उत्तर पढ़ा। बाद में मंत्री के पहुंचने पर सभापति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि देरी का स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं है।

आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का मुद्दा:
विधानसभा में विधायक रागिनी सोनकर ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हटाए जाने का विषय उठाया। इस पर मंत्री अनिल राजभर ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति के अनुसार किसी भी कर्मचारी को नहीं निकाला जाएगा।

महंगाई के मुद्दे पर सपा विधायक आशु मलिक कविता पढ़ने लगे, जिस पर स्पीकर सतीश महाना ने उन्हें टोकते हुए कहा कि प्रश्न पूछें और नियमों का पालन करें।

बजट सत्र के अंतिम दिन शिक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक टिप्पणियों के बीच सदन में बहस का माहौल बना रहा।

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