देश में UGC कानून को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में बीती रात एक घटनाक्रम सामने आया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी। रात करीब 2 बजे आर्यन मिश्रा ने भाजपा (BJP) से जुड़े कुछ सवर्ण समाज के नेताओं के सरकारी आवास के बाहर पोस्टर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस घटनाक्रम के बाद राजधानी में हलचल देखी गई और यह मामला सवर्ण समाज के बीच चर्चा का विषय बन गया।

सरकारी आवासों के बाहर लगे पोस्टर:
प्राप्त जानकारी के अनुसार आर्यन मिश्रा ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर बृजेश पाठक (Brijesh Pathak), पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर और वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) तथा मंत्री दिनेश प्रताप सिंह (Dinesh Pratap Singh) के आवास के बाहर पोस्टर लगाए। इन पोस्टरों के माध्यम से उन्होंने उन नेताओं के प्रति नाराजगी जताई, जो सरकार में रहते हुए भी UGC कानून के खिलाफ खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। पोस्टरों में यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सवर्ण समाज के भीतर इस कानून को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
सवर्ण समाज में उभरती नाराजगी:
UGC कानून को लेकर सवर्ण समाज के एक वर्ग में यह भावना सामने आ रही है कि सरकार में प्रतिनिधित्व के बावजूद उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। आर्यन मिश्रा के पोस्टरों में इसी असंतोष को उजागर किया गया। पोस्टर लगाने की इस कार्रवाई को प्रतीकात्मक विरोध के रूप में देखा जा रहा है, जिससे समाज के भीतर चल रही बेचैनी सामने आई है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।
प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर भी विरोध:
सरकारी आवासों के साथ-साथ आर्यन मिश्रा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय (BJP Office) के बाहर भी पोस्टर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस कदम के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि वे इस कानून को लेकर सरकार के खिलाफ लगातार आवाज उठाने के लिए तैयार हैं। पोस्टरों में यह संकेत भी दिया गया कि जब तक संबंधित मंत्री इस्तीफा नहीं देते और यह कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।

सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश:
इस पूरे घटनाक्रम को UGC कानून के खिलाफ दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पोस्टर अभियान के जरिए सरकार और पार्टी नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया है। हालांकि, इस विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज किया गया और किसी तरह की अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली। प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही जा रही है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
आगे क्या होगा:
UGC कानून को लेकर जारी विरोध अब सड़कों से लेकर पोस्टरों तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और संबंधित नेता इस असंतोष पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल, लखनऊ में हुआ यह पोस्टर अभियान इस बात का संकेत है कि UGC कानून को लेकर असहमति थमने वाली नहीं है और यह मुद्दा आगे भी चर्चा में बना रह सकता है।
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