अब 10% ग्लोबल टैरिफ… ट्रंप के इस फैसले का भारत समेत बाकी देशों पर क्या असर, जानें हर सवाल का जवाब

अमेरिका में टैरिफ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के महज तीन घंटे के भीतर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर 10 प्रतिशत का ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। ट्रम्प ने कहा कि वह एक आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत सभी देशों पर समान रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पूर्व ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और संवैधानिक आधार:
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of the United States) ने 6-3 के बहुमत से निर्णय सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि संसद को है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शक्ति विधायिका के पास निहित है। इस फैसले के बाद ट्रम्प प्रशासन को बड़ा झटका लगा, लेकिन कुछ ही घंटों में नई रणनीति के तहत 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा कर दी गई।

ट्रम्प की प्रतिक्रिया और बयान:
डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने अदालत के फैसले को “बहुत निराशाजनक” बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें अदालत के कुछ जजों पर शर्म आती है और वे देश के हित में सही निर्णय लेने की हिम्मत नहीं दिखा रहे हैं। ट्रम्प ने तीन कंजरवेटिव जजों की सराहना की, जिन्होंने फैसले से असहमति जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ लागू करने के लिए उन्हें संसद की आवश्यकता नहीं है और वह राष्ट्रपति को मिले अधिकारों के तहत कदम उठा सकते हैं।

भारत और अन्य देशों पर असर:
ब्रिटेन (United Kingdom), भारत (India) और यूरोपीय संघ (European Union) सहित वे देश, जिन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किए हैं, अब धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ का सामना करेंगे। बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस (White House) के एक अधिकारी ने बताया कि भारत पर कुल टैरिफ 18 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगा। हालांकि भारत के साथ ट्रेड डील में किसी बदलाव से ट्रम्प ने इनकार किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) उनके अच्छे मित्र हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की अहम बातें:
ट्रम्प ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया है, इसलिए सरकार किसी कंपनी को वसूला गया टैरिफ वापस नहीं करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। उनका कहना था कि यदि टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश कुछ उद्योगों में अमेरिका से आगे निकलते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व राष्ट्रपतियों को यह कदम पहले ही उठा लेना चाहिए था।

सेक्शन 122 और कानूनी प्रावधान:
सेक्शन 122, ट्रेड एक्ट 1974 (Trade Act of 1974) का हिस्सा है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को आपात आर्थिक परिस्थितियों में आयात पर अस्थायी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इसके तहत बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अधिकतम 150 दिनों तक टैरिफ लागू किया जा सकता है। इस दौरान सरकार हालात की समीक्षा करती है। एनबीसी न्यूज (NBC News) के अनुसार सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने से जिन देशों पर पहले अधिक टैरिफ था, वह घट जाएगा।

लागू होने की तारीख और छूट:
यह नया टैरिफ 24 फरवरी की आधी रात से लागू होगा। व्हाइट हाउस के दस्तावेजों के मुताबिक इससे डॉलर के बहाव को नियंत्रित करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जिनमें कुछ कृषि उत्पाद, महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन शामिल हैं। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने बताया कि कई प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर सेक्शन 301 के तहत जांच शुरू की जाएगी।

ऐतिहासिक संदर्भ:
साल 1971 में तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (Richard Nixon) ने भी वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। उस समय अमेरिका के भुगतान संतुलन में भारी असंतुलन था और डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद 1974 में ट्रेड एक्ट पारित किया गया, ताकि भविष्य में आर्थिक आपात स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रपति को कानूनी अधिकार मिल सके। न्यूयॉर्क टाइम्स (The New York Times) की रिपोर्ट के अनुसार सेक्शन 122 का पहले कभी उपयोग नहीं हुआ है, इसलिए यदि इसे अदालत में चुनौती दी जाती है तो उसकी व्याख्या कैसे होगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।


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