वॉशिंगटन (Washington) में आयोजित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने का दावा किया। गुरुवार को दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि उन्होंने दोनों देशों को 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद हालात शांत हुए। ट्रम्प के अनुसार उस समय दोनों देशों के बीच संघर्ष की स्थिति गंभीर थी और लड़ाई तेज हो गई थी।
टैरिफ चेतावनी का किया जिक्र:
डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उस दौरान विमान गिराए जा रहे थे और हालात तेजी से बिगड़ रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से फोन पर बात की थी। ट्रम्प के मुताबिक उन्होंने दोनों नेताओं से स्पष्ट कहा कि यदि संघर्ष समाप्त नहीं किया गया तो किसी भी प्रकार की ट्रेड डील नहीं की जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि आर्थिक नुकसान की आशंका सामने आने के बाद दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार हुए। ट्रम्प ने यह भी कहा कि संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस देश के थे।
मध्यस्थता पर भारत का रुख:
डोनाल्ड ट्रम्प इससे पहले भी 75 से अधिक बार भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित जंग रुकवाने का दावा कर चुके हैं। वहीं भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। भारत का आधिकारिक रुख यही रहा है कि सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से ही संभव है।
शहबाज शरीफ की टिप्पणी:
कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने स्वीकार किया था कि उनकी पहल से संभावित युद्ध टल गया। ट्रम्प के अनुसार यदि हालात नियंत्रित न होते तो करीब 2.5 करोड़ लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। उन्होंने कहा कि उनके हस्तक्षेप से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान टला।
इस दौरान एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें ट्रम्प के कहने पर शहबाज शरीफ खड़े होते दिखे। शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को दक्षिण एशिया का रक्षक बताते हुए उनकी पहल की सराहना की।
चीन दौरे की घोषणा:
चीन को लेकर भी ट्रम्प ने बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनका राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अच्छा संबंध है और वे अप्रैल में चीन यात्रा पर जाने वाले हैं। ट्रम्प ने पिछली चीन यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका भव्य स्वागत किया गया था। उन्होंने सैनिकों की अनुशासनबद्ध उपस्थिति का जिक्र करते हुए हल्के अंदाज में टिप्पणी भी की।
भारत की भागीदारी:
‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने ऑब्जर्वर देश के रूप में हिस्सा लिया। भारत की ओर से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स नमग्या सी खम्पा ने प्रतिनिधित्व किया। हालांकि भारत ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इस बोर्ड का पूर्णकालिक सदस्य बनेगा या नहीं। उल्लेखनीय है कि भारत ने पूर्व में दावोस में हुए इसके लॉन्च कार्यक्रम में भाग नहीं लिया था।
बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज की घोषणा भी की गई। ट्रम्प के अनुसार 9 सदस्य देश 7 अरब डॉलर का योगदान देंगे, जबकि अमेरिका 10 अरब डॉलर देने की बात कर रहा है।
इस बयान के बाद एक बार फिर भारत-पाक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर की गई दावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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