बाघ के आतंक से दहला गांव…

रिपोर्टर : हर्ष गुप्ता

लखीमपुर खीरी के पलिया (Palia) क्षेत्र में उस समय हड़कंप मच गया जब बाघ के हमले में एक मवेशी की मौत हो गई। घटना से नाराज ग्रामीणों ने बाघ के बढ़ते आतंक और वन विभाग (Forest Department) की लापरवाही के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। मृत मवेशी का शव ग्रामीणों ने पलिया वन मुख्यालय (Forest Headquarters) के सामने रखकर विरोध जताया।

गांव में दहशत का माहौल:
ग्राम बसंतापुर खुर्द (Basantapur Khurd) में बाघ के हमले के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई दिनों से बाघ लगातार क्षेत्र में घूम रहा है। खेतों में काम करना या मवेशियों को चराने ले जाना अब जोखिम भरा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग को बार-बार सूचना देने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

वन विभाग पर लापरवाही के आरोप:
गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि विभाग की निष्क्रियता के कारण अब जंगली जानवर गांवों तक पहुंच रहे हैं और मवेशियों पर हमला कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि यदि विभाग समय रहते कार्रवाई करता तो यह घटना नहीं होती।

मुआवजा और सुरक्षा की मांग:
ग्रामीणों ने मांग की है कि मृत मवेशी के मालिक को उचित मुआवजा दिया जाए और बाघ के आतंक से राहत के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। उन्होंने वन विभाग से गांव के आसपास ट्रैप कैमरे लगाने, बाघ की लोकेशन ट्रैक करने और निगरानी बढ़ाने की मांग की।

पुलिस बल की तैनाती से संभला माहौल:
पलिया वन मुख्यालय पर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एकत्र हुए। बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जा रही है और बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

आंदोलन की चेतावनी:
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल मवेशी की मौत का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा का सवाल है।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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