लखनऊ के विकासनगर इलाके में तैनात IPS अफसर यमुना प्रसाद के घर चोरी की बड़ी घटना सामने आई है। चोर घर से नकदी, गहनों, घड़ियों के साथ टोटियां तक चुरा ले गए। यमुना प्रसाद वही अधिकारी हैं जिन्होंने मुख्तार अंसारी पर शिकंजा कसते हुए उसे पंजाब से लग्जरी एम्बुलेंस में गिरफ्तार कराया था। उस एम्बुलेंस का रजिस्ट्रेशन फर्जी कागजों पर हुआ था और इसी मामले में दर्ज मुकदमा ही मुख्तार को उत्तर प्रदेश लाने की सबसे बड़ी वजह बना था।
नोएडा में तैनाती, लखनऊ का घर रिश्तेदार देख रहे थे
राजधानी लखनऊ के विकासनगर इलाके में यमुना प्रसाद का आवास है। हालांकि, वह लंबे समय से यहां नहीं रह रहे थे क्योंकि उनकी वर्तमान तैनाती नोएडा में DCP पद पर है। परिवार भी उनके साथ वहीं रहता है। लखनऊ वाले मकान की देखरेख उनके रिश्तेदार असित सिद्धार्थ कर रहे थे। चोरी का खुलासा भी असित ने ही पुलिस को किया। उनके अनुसार, घर की खिड़की की ग्रिल काट दी गई थी और नकदी सहित कई कीमती सामान चोरी हो गए थे।
बिजली काटकर की वारदात
असित सिद्धार्थ ने बताया कि 22 सितंबर की शाम जब वे घर पहुंचे तो बिजली नहीं थी। अगले दिन यानी 23 सितंबर को जब बिजली विभाग के कर्मचारी पहुंचे और घर खोला गया तो पूरा सामान बिखरा पड़ा था। खिड़की की ग्रिल टूटी हुई थी और अलमारियों को अस्त-व्यस्त कर दिया गया था। कमरों में रखा हर सामान इधर-उधर फेंका गया था।
पुलिस जांच में जुटी
घटना की जानकारी तुरंत विकासनगर थाने को दी गई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। आसपास के इलाकों की कई सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही हैं ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके। चोरी में 50 हजार रुपये नकद, चांदी के 10 सिक्के, तीन कलाई घड़ी, दो दीवार घड़ी, कई गिफ्ट आइटम, चांदी के गिलास और कटोरी के अलावा करीब 20 टोटियां ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
कौन हैं यमुना प्रसाद
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में 1977 में जन्मे यमुना प्रसाद का बचपन साधारण परिवार में बीता। उनके पिता घनश्याम प्रसाद जिले में ही ठेकेदारी का काम करते थे। शुरुआती पढ़ाई बढ़नी कस्बे से हुई। वर्ष 2001 में स्टेट पीसीएस में चयन हुआ और 2004 में उन्होंने कोऑपरेटिव और पंचायत विभाग में नौकरी जॉइन की।
लेकिन यमुना प्रसाद का लक्ष्य सिविल सर्विस था। 2009 में पहली बार सिविल सेवा परीक्षा में बैठे लेकिन सफलता नहीं मिली। 2010 में दूसरी बार भी असफल रहे। आखिरकार तीसरे प्रयास में उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा पास की और 2012 में उत्तर प्रदेश कैडर में IPS के तौर पर नियुक्त हुए।
वाराणसी में पहली बड़ी जिम्मेदारी
पहली तैनाती उन्हें वाराणसी में स्वतंत्र ASP के रूप में मिली। उस समय लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी थी और वाराणसी से नरेंद्र मोदी मैदान में थे। चुनाव प्रबंधन की अहम जिम्मेदारी यमुना प्रसाद को सौंपी गई, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया।