लखनऊ/प्रयागराज। हमारे देश में हर वर्ग सैनिक का सम्मान करता है वह सैनिक जो अपने परिवार से दूर रहकर हम सबके परिवार की रक्षा करते हैं। लेकिन यदि किसी सैनिक के बेटे को उसके ना रहने के बाद भीख मांगने की नौबत आ जाए तो इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा? कुछ ऐसी ही कहानी है कमलेश की। उन्हें नहीं पता था कि पिता की पेंशन कहां से मिलेगी। पैसे थे नहीं इसलिए दाल, रोटी के लिए ट्रेन में बक्सर से पटना तक भीख मांगते थे।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कमलेश चौबे बिहार राज्य के बक्सर जनपद के ठेदुआ के निवासी हैं। पिता दीनानाथ सेना में नायक पद थे, वह 1989 में सेवानिवृत्त होने के बाद 1990 में डीएससी में भर्ती हो गए और 2000 में सेवानिवृत्त हुए। उनके दो पुत्रों बड़े बेटे कमलेश जन्म से ही दिव्यांग हैं। कमलेश की शादी 2006 में कर दी। 2009 में मां तारा मुनि और 2014 में पिता का निधन हो गया। मां बाप का साया सर से उठने के बाद कमलेश की मुश्किलें शुरू हो गई।
वसुदेव कुटुंबकम वाले इस देश में छोटे भाई ने अपने बड़े भाई, जो कि दिव्यांग है, उनको खर्च देना बंद कर दिया। कमलेश दृष्टि बाधित हैं और वो आर्थिक तंगी से जूझने लगे। खाने के लिए भोजन नहीं था तो कमलेश, भीख मांग कर गुजारा करने लगे। उन्हें नहीं पता था कि पिता की पेंशन कहां से मिलेगी। पैसे थे नहीं इसलिए दाल, रोटी के लिए ट्रेन में बक्सर से पटना तक भीख मांगते थे।
7 वर्षों तक यह सिलसिला चलता रहा। लेकिन कहते हैं ना, धरती पर मजबूर लोगों का कोई ना कोई सहारा बनकर आ ही जाता है। खबर के अनुसार वर्ष 2023 में कमलेश की मुलाकात ट्रेन में रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (पेंशन) के वेलफेयर मनोज कुमार सिंह से हो गई। जब मनोज कुमार सिंह को पता चला कि भीख मांगने वाला यह शख्स एक सैनिक का पुत्र है तो वह हैरान हो गए। फ़िर उन्होंने विस्तार जानकारी कर साक्ष्य जुटाए। काफी मशक्कत के बाद कमलेश की पेंशन मंजूर कराई। अगस्त 2024 में कमलेश को 15 लाख प्राप्त मिले और 21 हजार प्रतिमाह पेंशन मिलने लगी है।
किस्मत कब किसकी चमक जाए, कोई नहीं जान सकता। कुछ ऐसा ही हुआ जन्म से दिव्यांग कमलेश चौबे के साथ । सैनिक का दिव्यांग बेटा सात साल से ट्रेन में भीख मांग रहा था। लेकिन, रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (पेंशन) के वेलफेयर से उसकी भेंट हुई तो एक वर्ष में ही तकरीर बदल गई। गुरुवार को रक्षा लेखा प्रधान नियंत्रक (पेंशन) कार्यालय में अधिकारियों ने उसका सम्मान किया और इस पुनीत कार्य के लिए वेलफेयर की सराहना की।