21 किलो फूलों से पट्टाभिषेक… क्या चल रहा प्रयागराज में?

प्रयागराज (Prayagraj): किन्नर अखाड़े की पूर्व महामंडलेश्वर टीना मां (Teena Maa) अब नए “सनातनी किन्नर अखाड़ा (Sanatani Kinnar Akhada)” की आचार्य महामंडलेश्वर बन गई हैं। प्रयागराज में भव्य आयोजन के बीच उनका पट्टाभिषेक संपन्न हुआ। टीना मां के इस निर्णय ने किन्नर समाज में नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि हाल ही में ममता कुलकर्णी (Mamta Kulkarni) के किन्नर अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद से ही टीना मां के नाराज चलने की चर्चा थी।

संगम से जल लेकर शुरू हुआ अनुष्ठान:
पट्टाभिषेक से पहले टीना मां संगम से पवित्र जल लेकर बैरहना स्थित अपने आश्रम पहुंचीं। यहां उनके गुरु अंजलि (Anjali) ने विधि-विधान के साथ उनका पट्टाभिषेक कराया। इस अवसर पर माहौल पूरी तरह धार्मिक रंग में रंगा रहा। टीना मां ने पट्टाभिषेक के बाद “सनातनी किन्नर अखाड़ा” के नए ध्वज को फहराया, जिससे पूरा परिसर जयघोष से गूंज उठा।

धार्मिक अनुष्ठान और भव्य आयोजन:
टीना मां के पट्टाभिषेक कार्यक्रम के दौरान 51 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार किया। काशी (Kashi) से आए 20 से अधिक डमरू वादकों ने अपने प्रदर्शन से वातावरण को और भी ऊर्जावान बना दिया। बैंडबाजों की धुन पर किन्नरों ने नृत्य किया और हाथों में त्रिशूल व तलवार लेकर पारंपरिक करतब भी दिखाए। आयोजन का हर पल भक्ति और उल्लास से भरा रहा।

नए पदाधिकारियों की घोषणा:
पट्टाभिषेक के बाद टीना मां ने “सनातनी किन्नर अखाड़ा” के लिए नई घोषणाएं भी कीं। उन्होंने संज्ञानंद गिरी (Sanjananand Giri) को महामंडलेश्वर और संध्यानंद गिरी (Sandhyanand Giri) को श्रीमहंत पद पर नियुक्त करने की घोषणा की। इस निर्णय के साथ अखाड़े की नई संरचना को औपचारिक रूप दिया गया।

पूर्व अखाड़े से अलग होने का कारण बताया:
टीना मां ने कुछ दिन पहले ही महाकुंभ में चर्चा में रहे “किन्नर अखाड़े” के महामंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि, “किन्नर अखाड़ा उस रास्ते से भटक गया है, जिसके लिए इसकी स्थापना की गई थी। यही कारण है कि मैंने वहां से खुद को अलग कर लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि अब वे “सनातनी किन्नर अखाड़ा” के माध्यम से समाज में धर्म, संस्कृति और आस्था के वास्तविक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का कार्य करेंगी।

किन्नर समाज में नई दिशा की उम्मीद:
टीना मां के नए अखाड़े के गठन से किन्नर समाज में नई दिशा की उम्मीद जगी है। कई अनुयायियों का मानना है कि “सनातनी किन्नर अखाड़ा” समाज में आध्यात्मिक और धार्मिक चेतना के प्रसार में अहम भूमिका निभाएगा। वहीं, कुछ लोग इस कदम को किन्नर परंपरा के भीतर वैचारिक बदलाव के रूप में देख रहे हैं।


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डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवादाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

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