ज्ञान व भक्ति के शहर प्रयागराज के मूल निवासी सैय्यद अरीब अहमद ने शिक्षा, सेवा और संवेदनशील पुलिसिंग के जरिए एक विशिष्ट पहचान बनाई है। देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, बॉम्बे (Tata Institute of Social Sciences, Mumbai) से डेवलपमेंट प्रैक्टिस में पीजी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2018 बैच में यूपी पीसीएस (UP PCS) परीक्षा में सफलता प्राप्त की। इसके पश्चात यूपी पुलिस (Uttar Pradesh Police) में डिप्टी एसपी के रूप में चयनित होकर उन्होंने अपनी प्रशासनिक यात्रा शुरू की। सौम्य, शालीन और मृदुभाषी स्वभाव के साथ कार्यकुशल, कर्मठ और विज़नरी अधिकारी के रूप में उनकी पहचान बनी। अब उन्हें सीबीआई (Central Bureau of Investigation) में अपनी सेवाएं देने के लिए चुना गया है, जो उनके करियर का एक नया और चुनौतीपूर्ण अध्याय है।
प्रारंभिक नियुक्ति और प्रेरणा का स्रोत:
आगरा (Agra) में पहली नियुक्ति के दौरान उन्हें तत्कालीन एसपी और कानून विशेषज्ञ आईपीएस प्रभाकर चौधरी के अधीन कार्य करने का अवसर मिला। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (University of Allahabad) से एलएलबी की डिग्री प्राप्त प्रभाकर चौधरी के नेतृत्व और मार्गदर्शन ने सैय्यद अरीब अहमद को पुलिसिंग में नवाचार और जनहित के लिए कुछ नया करने की प्रेरणा दी। इस अनुभव ने उनके भीतर संवेदनशील प्रशासन और समाजोन्मुखी कार्यशैली का संकल्प मजबूत किया।
एसीपी ताज सुरक्षा व यातायात के रूप में नवाचार:
आगरा में एसीपी ताज सुरक्षा व यातायात (ACP Taj Security & Traffic) के पद पर रहते हुए उन्होंने पुलिसिंग को नई नीति और नई नीयत दी। विश्व धरोहर ताजमहल (Taj Mahal) लंबे समय से लपकागीरी की समस्या से जूझ रहा था। इस समस्या के तहत महिलाएं और बच्चे पर्यटकों को घेरकर जबरदस्ती सामान बेचने का प्रयास करते थे, जिससे पर्यटन की छवि प्रभावित होती थी। पुलिस पहुंचते ही यह समूह बिखर जाता और कुछ समय बाद फिर सक्रिय हो जाता। यह स्थिति पर्यटन उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही थी।
काउंसलिंग से समाधान की ऐतिहासिक पहल:
सैय्यद अरीब अहमद ने इस जटिल समस्या का समाधान दंड या भय से नहीं, बल्कि काउंसलिंग और शिक्षा के माध्यम से किया। उन्होंने लपकागीरी में शामिल बच्चों और महिलाओं से संवाद स्थापित किया, बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया। ताजमहल पर्यटक थाना (Tourist Police Station, Taj Mahal) में नियमित कक्षाएं शुरू कराईं गईं। इसके बाद लगभग 40 बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराया गया और उनकी पढ़ाई की निरंतर मॉनिटरिंग की गई। यह पहल न केवल आगरा बल्कि पूरे देश में सराही गई।
पर्यटन और पुलिस की छवि में सकारात्मक बदलाव:
इस संवेदनशील और दूरदर्शी पहल से ताज नगरी में लपकागीरी की समस्या समाप्त हुई और पुलिस विभाग के इतिहास में एक सकारात्मक अध्याय जुड़ा। पर्यटकों को सुरक्षित और सहज अनुभव मिला, जिससे पर्यटन को मजबूती मिली। यह मॉडल पुलिसिंग का उदाहरण बना, जिसमें कानून के साथ करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन दिखाई दिया।
यातायात सुधार और पुलिस-नागरिक समन्वय:
अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने यातायात सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और पुलिस-नागरिक समन्वय को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनसहभागिता, जागरूकता अभियानों और व्यावहारिक प्रबंधन से उन्होंने यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया। इससे सड़क सुरक्षा में सुधार और नागरिकों का पुलिस पर विश्वास बढ़ा।
लखनऊ में दायित्व और सीबीआई में चयन:
आगरा से स्थानांतरण के बाद वे लखनऊ (Lucknow) में एसीपी के पद पर तैनात रहे। वहां भी उनकी कार्यशैली सकारात्मक और परिणामोन्मुखी रही। अब सीबीआई द्वारा उनकी सेवाओं के लिए चयन किया जाना उनकी योग्यता, समर्पण और निष्पक्ष छवि का प्रमाण है। यह अवसर न केवल उनके लिए बल्कि पुलिस सेवा के लिए भी गौरव का विषय है।
आलोचनाओं के बीच प्रेरक उदाहरण:
पुलिस विभाग की आलोचना करने वालों के लिए सैय्यद अरीब अहमद की कार्यशैली एक प्रेरक उदाहरण है। उनकी सेवा, संवेदना और संकल्प यह दर्शाते हैं कि ईमानदार और शिक्षित पुलिसिंग से सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान संभव है। ऐसे अधिकारी पुलिस व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करते हैं और युवाओं के लिए आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
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