स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला 

रिपोर्टर: अनुज कुमार

प्रयागराज [Prayagraj]। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिगों के कथित यौन शोषण मामले में दर्ज पाक्सो केस में नामजद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी पर आदेश सुरक्षित रखा है। शुक्रवार शाम हुई सुनवाई करीब एक घंटे तक चली। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने आदेश सुनाया। यह फैसला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

कोर्ट में सुनवाई का विवरण:
सुनवाई के दौरान खचाखच भरी कोर्ट में बचाव पक्ष और वादी पक्ष दोनों की दलीलों को सुना गया। पीड़ितों की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया। बचाव पक्ष ने बताया कि एक पीड़ित नाबालिग है, जिसके आधार पर केस दर्ज किया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए आगे के आदेश सुरक्षित रखे।

एफआइआर और जांच:
आशुतोष ब्रह्मचारी की अर्जी पर विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) के आदेश के क्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद के खिलाफ बीते रविवार को झूंसी थाना में एफआइआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद पूछताछ की और पीड़ितों के बयान एवं मेडिकल जांच भी पूरी कर ली है।

आरोप का स्वरूप:
माघ मेला और महाकुंभ में नाबालिगों के साथ कुकर्म का आरोप स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी मुकुंदानंद पर लगाया गया है। इस मामले ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित किया है। सुनवाई से पहले ही कोर्ट में भारी संख्या में लोग और मीडिया मौजूद थे।

बचाव पक्ष की दलील:
बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोप और एफआइआर के आधार पर गिरफ्तारी की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अग्रिम जमानत की अर्जी की और कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक लगाई।

कोर्ट का आदेश और सुरक्षा:
न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक दी जा रही है, लेकिन मामले की सुनवाई और जांच पूरी होने तक आदेश सुरक्षित रहेंगे। इससे आरोपी और उनके सहयोगियों को राहत मिली है।

सार्वजनिक और कानूनी महत्व:
यह फैसला न केवल आरोपी के लिए बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और पीड़ितों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अहम है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहें।


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