Video: मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मरीजों के लिए आगे आईं राज्यसभा सांसद संगीता बलवंत, सदन में रखी सस्ती दवाओं की मांग

राज्यसभा सांसद संगीता बलवंत (Sangeeta Balwant) ने गुरुवार को सदन में मस्कुलर डिस्ट्राफ़ी (Muscular Dystrophy) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों की कठिनाइयों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह बीमारी मांसपेशियों को प्रभावित करती है, जिससे बच्चों और वयस्कों दोनों में शारीरिक अक्षमता बढ़ जाती है। इलाज का खर्च अत्यधिक होने के कारण कई मरीज उपचार शुरू करने या जारी रखने में सक्षम नहीं हो पाते, जिससे उनका जीवन और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

दवाओं की न्यूनतम दर पर उपलब्धता की मांग:
संगीता बलवंत (Sangeeta Balwant) ने सदन में इस मुद्दे को विस्तार से उठाते हुए आग्रह किया कि मस्कुलर डिस्ट्राफ़ी (Muscular Dystrophy) जैसी गंभीर और दीर्घकालिक बीमारी के लिए आवश्यक दवाओं को न्यूनतम दर पर उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना था कि यदि दवाओं की कीमतों में राहत मिलेगी, तो कई परिवार आर्थिक दबाव से मुक्त होकर अपने बच्चों और परिजनों के बेहतर इलाज के बारे में सोच सकेंगे।

चिकित्सा सुविधाओं की कमी से बढ़ रही मुश्किलें:
उन्होंने बताया कि मस्कुलर डिस्ट्राफ़ी (Muscular Dystrophy) के मरीजों को इलाज के साथ-साथ नियमित देखभाल, फिजियोथेरेपी और चिकित्सकीय उपकरणों की आवश्यकता होती है। लेकिन इन सुविधाओं की कमी और महंगे होने के कारण कई परिवार इलाज के बीच ही रुक जाते हैं या अधूरी चिकित्सा पर निर्भर हो जाते हैं।

पीड़ित परिवारों के लिए विशेष सुविधाओं की जरूरत:
अपनी बात रखते हुए संगीता बलवंत (Sangeeta Balwant) ने सरकार से मांग की कि ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इनमें जीवन यापन सहायता, उपकरणों पर सब्सिडी, पुनर्वास केंद्रों की स्थापना और मरीजों के लिए अनुकूल परिवेश तैयार करना शामिल है। उनका कहना था कि यदि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती है तो इससे न केवल मरीजों बल्कि उनके परिवारों का जीवन भी आसान हो सकेगा।

आर्थिक बोझ कम करने पर जोर:
उन्होंने यह भी कहा कि बीमारी लंबे समय तक चलने वाली होने के कारण परिवार आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा दवाओं, इलाज और जीवन उपयोगी सहायता पर राहत देना जरूरी है, ताकि प्रभावित लोग सम्मानजनक जीवन जी सकें।

सरकारी हस्तक्षेप से मिलेगा जीवन को सहारा:
सदन में अपनी बात रखते हुए उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि सरकार इस गंभीर स्वास्थ्य मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाएगी और जल्द ही ऐसे कदम उठाएगी, जिनसे मस्कुलर डिस्ट्राफ़ी (Muscular Dystrophy) से जूझ रहे लोगों और उनके परिवारों को वास्तविक राहत मिल सके।



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