अखिलेश के विधायक के बिगड़े बोल, बोला पकिस्तान दुश्मन नहीं…

स्पेशल रिपोर्ट|| हेड लाइन देखकर आप भी चिंतित हो गए या गाली देने लगे. ये सब बिलकुल मत करियेगा, ये आपके संस्कार को परिभाषित करेगा. पहले पूरी खबर को पढ़िए और फिर विचार कीजिये. मैटनी शो वाले एंकर की तरह बीपी हाई करने कि बिलकुल आवश्यकता नहीं है. यहीं नहीं अब पत्रकारों ने पत्रकारों के खिलाफ ही मुहीम छोड़ दिया है. निष्पक्ष और दलाल जैसे शब्दों के भी एक नया युद्ध शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश के दामों में प्रेस क्लब में पोस्टर ही लगा दिया कि दलाल पत्रकारों पत्रकारिता छोड़ दो. इस से पता चलता है कि प्रेस के भीतर काम करने वाले पत्रकारों का भी दम घुटता जा रहा है. कुछ आर्थिक रूप से कमजोर होकर आने आकाओं की हर बात को मानाने के लिए मजबूर हैं और कुछ विशेष विचाराधार के प्रवाह में अंधे हो चुकें हैं.

ख़बरों को प्रस्तुत करने का ढंग ऐसा हो चला है कि कब किसका सम्मान हो जाये किसका अपमान, कहा नहीं जा सकता. कुछ ऐसा ही हुआ उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर में. गाजीपुर शहर स्थित MAH इंटर कॉलेज में सर सैयद डे पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में छात्रों ने कविता और शायरी के माध्यम से इसकी कार्यक्रम की शोभा बढाई. इन छात्रों की प्रस्तुति में हिन्दू मुस्लिम एकता में जो जहर घोला जा रहा है उसका दर्द स्पष्ट रूप से झलक रहा था. सवाल ये था कि आखिर आज़ादी के 75 साल बाद भी हिन्दू मुस्लिम एकता लिए इतना संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है?

इस बिच गाजीपुर सदर विधायक जय किशुन शाहू ने छात्रों को संबोधित करना शुरू किया और उन्होंने कुछ ऐसा बोला कि जिससे टीवी के मैटनी शो 2 घंटे का डिबेट कार्यक्रम हो जाये और TRP से मैटनी शो वाले एंकर नाचने लगे. खैर हमारा काम नफरत फैलाना नहीं, सत्य को दिखाना है. जय किशुन शाहू ने कहा कि मुलायम सिंह यादव कहते थे की हमारा असली दुश्मन पकिस्तान नहीं चीन है, लेकिन आज सत्ताधारी हिन्दू-मुस्लिम और पकिस्तान के नाम पर समाज को बरगलाने का काम कर रहे हैं और समाज में नफरत पैदा कर रहे हैं.

दरअसल इस कार्यक्रम के माध्यम से कॉलेज प्रबंधन सर सैयद के सिधान्तों पर प्रकाश डालने का प्रयास कर रहा था. कॉलेज के प्रधानाचार्य खालिद आमिर का कहना था कि सर सैयद ने अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नीव रखी थी, लेकिन उस वक्त वो यूनिवर्सिटी नहीं था और न ही उसके नाम में मुस्लिम शब्द का प्रयोग था , बाद में जब यूनिवर्सिटी बनी तो उसमे मुस्लिम शब्द लगा दिया गया जो गलत था. ये यूनिवर्सिटी सभी धर्मों के छात्रों के लिए बना था और सर सैयद सभी धर्मों के छात्रों में शिक्षा का विस्तार करना चाहते थे. उनके लिए हिन्दू मुस्लिम सब एक सामान थे. किसी शिक्षण संस्थान में धर्म या जाती से सम्बंधित शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए.

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