लोहिया संस्थान में 3डी इको कार्यशाला संपन्न: हृदय रोग निदान में नई दिशा…
लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences) के हृदय रोग विभाग द्वारा 1 नवम्बर 2025 को “संरचनात्मक हृदय रोगों हेतु 3डी इको (3D Echo for Structural Heart Diseases)” विषय पर एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान के प्रशासनिक भवन स्थित ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में चिकित्सकों, रेज़िडेंट्स और तकनीशियनों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को तीन-आयामी इकोकार्डियोग्राफी (3D Echocardiography) तकनीक की नवीनतम प्रगति और उसके नैदानिक उपयोग से परिचित कराना था।
आधुनिक तकनीक से हृदय रोगों के निदान में सटीकता:
इस कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि 3डी इको तकनीक पारंपरिक 2डी इको की तुलना में अधिक उन्नत और सटीक है। यह चिकित्सकों को हृदय की संरचना और वाल्व की स्थिति को वास्तविक रूप में देखने की सुविधा देती है, जिससे सर्जरी और उपचार की योजना अधिक प्रभावी तरीके से बनाई जा सकती है। इस तकनीक का उपयोग विशेष रूप से उन मरीजों के लिए किया जा रहा है जिन्हें संरचनात्मक हृदय रोग (Structural Heart Diseases) हैं।
प्रो. (डॉ.) भुवन चन्द्र तिवारी का उद्बोधन:
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. (डॉ.) भुवन चन्द्र तिवारी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, हृदय रोग विभाग ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि “3डी इको तकनीक आज हृदय रोग विज्ञान में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लेकर आई है। यह चिकित्सकों को हृदय की आंतरिक संरचना को सटीक रूप में देखने का अवसर देती है, जिससे रोगों का निदान पहले की अपेक्षा अधिक सटीकता से किया जा सकता है।” उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं न केवल चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता को बढ़ाती हैं, बल्कि मरीजों के लिए भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करती हैं।
कार्यशाला में चिकित्सकों और विशेषज्ञों की सहभागिता:
इस आयोजन में कई विशेषज्ञों ने 3डी इको के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को नई तकनीक का व्यावहारिक अनुभव कराया। हृदय रोग विभाग के रेज़िडेंट्स ने भी इस अवसर पर प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें उन्होंने 3डी इको के नैदानिक अनुप्रयोगों पर अपने अनुभव साझा किए।
हृदय रोग उपचार में 3डी इको की भूमिका:
चिकित्सकों के अनुसार, यह तकनीक हृदय की जटिल संरचनाओं का त्रि-आयामी (3D) चित्र प्रदान करती है, जिससे वाल्व विकार, जन्मजात दोष और अन्य संरचनात्मक समस्याओं का निदान बेहद आसान हो गया है। इस तकनीक के प्रयोग से हृदय रोगों के उपचार में सटीकता और सफलता दर में उल्लेखनीय सुधार आया है।
भविष्य की दिशा:
कार्यशाला के समापन सत्र में यह निष्कर्ष निकाला गया कि 3डी इको तकनीक आने वाले समय में हृदय रोगों के निदान और उपचार की दिशा को नई परिभाषा देगी। लोहिया संस्थान (RMLIMS) ने इस दिशा में पहल कर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के स्तर को नई ऊंचाई दी है।
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