सर सैय्यद अहमद खां की 208वीं जयंती पर शिक्षा और एकता पर हुआ मंथन

रिपोर्ट : हसीन अंसारी

दार्शनिक, विचारक, आध्यात्मिक, लेखक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सम्पन्न महान व्यक्तित्व सर सैय्यद अहमद खां (Sir Syed Ahmad Khan) की 208वीं जयंती एम.ए.एच. इंटर कॉलेज (M.A.H. Inter College) परिसर के सर सैय्यद हॉल (Sir Syed Hall) में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर “वर्तमान भारतीय परिवेश में सर सैय्यद की प्रासंगिकता” विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र ग्रंथ कुरान शरीफ (Quran Sharif) की तिलावत कक्षा 10 के छात्र अलीमुल्लाह और मोहम्मद शाद ने की। कॉलेज के प्रधानाचार्य मोहम्मद खालिद अमीर (Principal Mohd. Khalid Ameer) ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया। माल्यार्पण के बाद कॉलेज के प्रबंधक हाजी मोहम्मद वारिस हसन खां (Manager Haji Mohd. Waris Hasan Khan) ने मुख्य अतिथियों को मेमेंटो भेंट कर सम्मानित किया।

शिक्षा ही समाज को प्रगति की ओर ले जाती है:
लखनऊ विश्वविद्यालय (Lucknow University) के उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अब्बास रज़ा नय्यर (Prof. Abbas Raza Nayyar) ने कहा कि सर सैय्यद अहमद खां ने हमेशा साक्षरता और शिक्षा को प्राथमिकता दी। उनका मानना था कि जब लोग शिक्षित होंगे तो अज्ञानता दूर होगी, और समाज में सकारात्मक सोच और प्रगतिशील दृष्टिकोण विकसित होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति को परंपराओं की बेड़ियों से मुक्त कर प्रकाश की ओर अग्रसर करती है।

प्रोफेसर नय्यर ने कहा कि सर सैय्यद ने आने वाली पीढ़ियों को कुरीतियों से दूर रहने का मार्ग दिखाया और बताया कि सभी बुराइयों की जड़ अज्ञानता है। उन्होंने कहा था कि “हिन्दू और मुस्लिम दो धार्मिक शब्द हैं, लेकिन राष्ट्र की दृष्टि से दोनों एक ही कौम हैं।” भारत को उन्होंने एक सुन्दर दुल्हन बताया, जिसकी दो खूबसूरत आंखें हिन्दू और मुसलमान हैं — दोनों का सुरक्षित रहना ही देश की खूबसूरती है।

वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक विकास की आवश्यकता:
नय्यर ने आगे कहा कि वर्तमान युग वैज्ञानिक युग है, जो ज्ञान और शिक्षा पर आधारित है। हमें शैक्षिक विकास को सभ्यता और संस्कृति से जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपने बच्चों को संस्कार और शिक्षा दोनों में आगे बढ़ाना होगा। भारत प्रेम और सौहार्द का प्रतीक देश है, और हमारी संस्कृति इसकी असली धरोहर है।

प्रोफेसर नय्यर ने उर्दू के महान कवि अल्लामा इकबाल (Allama Iqbal) का शेर उद्धृत करते हुए कहा—
“हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है,
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में कोई दीदवर पैदा।”

उन्होंने कहा कि सर सैय्यद अहमद खां जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं, जिन्होंने समाज को रोशनी की राह दिखाई।

शिक्षा और सभ्यता के प्रतीक थे सर सैय्यद:
इंटरफेथ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (Interfaith Foundation of India) के अध्यक्ष डॉ. ख्वाजा इफ्तिखार अहमद (Dr. Khwaja Iftikhar Ahmed) ने कहा कि सर सैय्यद ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने शिक्षा को वह ज्योति बताया जिसके प्रकाश में हर व्यक्ति प्रगति का मार्ग देख सकता है। सर सैय्यद केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कृति के रक्षक भी थे।

एकता और साक्षरता के प्रेरणास्रोत:
गाजीपुर (Ghazipur) सदर विधायक जय किशन साहू (Jai Kishan Sahu) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि सर सैय्यद एक दूरदर्शी और दार्शनिक चिंतक थे। उन्होंने अपने जीवन को देश के बच्चों को साक्षर बनाने, समाज में एकता लाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने में समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि आज भी सर सैय्यद के विचार भारतीय समाज के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। उनकी शिक्षा और एकता की भावना हमें एक मजबूत और प्रगतिशील भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती है।

समापन:
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने सर सैय्यद अहमद खां के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में शिक्षा, सौहार्द और एकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।


#Tag: #SirSyedAhmadKhan #Lucknow #Education #Unity

डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय संवाददाता/मीडिया प्लेटफार्म या अन्य द्वारा प्राप्त की गई सूचना पर आधारित है।

Related Post

Leave a Reply

Discover more from Apna Bharat Times

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading