Video: दिल्ली की सीक्रेट शुद्धि सभा का दावा, हर हफ्ते 400 मुस्लिम-ईसाई कर रहे घर वापसी! जानिए पूरा सच

दिल्ली (Delhi) के कमला नगर (Kamla Nagar) स्थित आर्य समाज मंदिर (Arya Samaj Mandir) में इन दिनों शुद्धिकरण यानी वैदिक धर्म में वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। मंदिर परिसर में हाल ही में हुई एक प्रक्रिया के बाद यह विषय फिर चर्चा का केंद्र बन गया। मंदिर परिसर में हवन कुंड से उठते धुएं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक युवती के वैदिक धर्म अपनाने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद इस पूरी प्रक्रिया को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई।

आर्य समाज मंदिर में हुई शुद्धि प्रक्रिया:
मंदिर के सेवादारों के अनुसार हाल ही में एक मुस्लिम युवती ने वैदिक परंपरा के अनुसार हिंदू धर्म स्वीकार किया। वैदिक मंत्रों और हवन के बीच पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। इसके बाद युवती के माथे पर तिलक लगाया गया और हाथ में कलावा बांधा गया। शुद्धिकरण के बाद उसका नया नाम भी रखा गया। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह व्यक्ति की इच्छा और सहमति के आधार पर होती है।

मंदिर के पास संचालित है शुद्धि सभा:
आर्य समाज मंदिर (Arya Samaj Mandir) के पास ही भारतीय हिंदू शुद्धि सभा (BHSS) का छोटा कार्यालय संचालित होता है। यहां वर्षों से शुद्धिकरण से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। संस्था से जुड़े लोगों का दावा है कि यहां हर सप्ताह बड़ी संख्या में लोग वैदिक धर्म में वापसी के लिए पहुंचते हैं। हालांकि संस्था के पदाधिकारी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अधिक जानकारी सार्वजनिक करने से बचते नजर आए।

हर सप्ताह सैकड़ों लोगों के आने का दावा:
भारतीय हिंदू शुद्धि सभा (BHSS) से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों से लोग यहां पहुंचते हैं। कोई अकेले आता है तो कोई परिवार के साथ। संस्था के अनुसार कई लोग विवाह, सामाजिक पहचान और पारिवारिक कारणों से वैदिक धर्म अपनाने का निर्णय लेते हैं। संस्था ने दावा किया कि शुद्धिकरण की हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा जाता है।

शुद्धि आंदोलन का बताया गया इतिहास:
भारतीय हिंदू शुद्धि सभा (BHSS) के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ ने बताया कि शुद्धि आंदोलन की शुरुआत आर्य समाज (Arya Samaj) के संस्थापक दयानंद सरस्वती के समय से मानी जाती है। उन्होंने दावा किया कि वैदिक परंपरा में वापसी का यह अभियान लंबे समय से चल रहा है। संस्था के मुताबिक 1923 में स्वामी श्रद्धानंद ने बड़े स्तर पर शुद्धि अभियान चलाया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने वैदिक धर्म स्वीकार किया।

आगरा के गांव में आज भी मौजूद ‘शुद्धि’ नाम:
आगरा (Agra) के रायभा गांव का भी इस अभियान से जुड़ा उल्लेख किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में आज भी एक मोहल्ले का नाम “शुद्धि” है, जिसे पुराने इतिहास से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि गांव के अधिकतर लोग इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलने से बचते नजर आए।

विदेशों तक पहुंचा शुद्धि अभियान:
संस्था के पदाधिकारियों का दावा है कि भारत के अलावा विदेशों में भी शुद्धिकरण अभियान से जुड़े लोग सक्रिय हैं। संस्था ने अमेरिका (America) और दक्षिण अफ्रीका (South Africa) जैसे देशों में भी वैदिक परंपरा में वापसी से जुड़े मामलों का उल्लेख किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सामाजिक और धार्मिक बहस के केंद्र में मुद्दा:
शुद्धिकरण और घर वापसी का मुद्दा लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक बहस का हिस्सा रहा है। समर्थक इसे वैदिक परंपरा में वापसी बताते हैं, जबकि आलोचक इसे संवेदनशील सामाजिक विषय मानते हैं। फिलहाल कमला नगर (Kamla Nagar) स्थित आर्य समाज मंदिर (Arya Samaj Mandir) में हुई हालिया प्रक्रिया के बाद यह विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया है।


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