गाजीपुर (Ghazipur) जिले के जमानियां (Zamania) क्षेत्र स्थित पटकनियां (Patkaniya) गांव के लिए रविवार, 28 जून का दिन गर्व और खुशी लेकर आया। भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy-IMA) से प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट बने सौरभ सिंह (Saurabh Singh) पहली बार अपने पैतृक गांव पहुंचे। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका फूल-मालाओं, जयघोष और उत्साह के साथ भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर उनके माता-पिता का भी सम्मान किया गया, जिससे पूरे गांव में खुशी और गौरव का माहौल देखने को मिला।

गांव में हुआ भव्य स्वागत और सम्मान:
पटकनियां (Patkaniya) गांव पहुंचते ही सौरभ सिंह (Saurabh Singh) का ग्रामीणों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया गया और गांववासियों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई। इस दौरान उनके पिता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) और माता सविता सिंह (Savita Singh) को भी सम्मानित किया गया। ग्रामीणों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया।
पहले ही प्रयास में पास की थी एनडीए परीक्षा:
सौरभ सिंह (Saurabh Singh) ने वर्ष 2022 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान ही पहले प्रयास में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy-NDA) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय थल सेना (Indian Army) के लिए चयन प्राप्त किया था। उस समय उनकी आयु मात्र 17 वर्ष थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान (Rajasthan) के चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) स्थित सैनिक स्कूल (Sainik School) से हुई। हाईस्कूल परीक्षा में उन्होंने 92.8 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।
साधारण किसान परिवार से हैं सौरभ:
सौरभ सिंह (Saurabh Singh) एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) खेती-किसानी करते हैं, जबकि उनकी माता सविता सिंह (Savita Singh) गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद सौरभ ने मेहनत और अनुशासन के बल पर भारतीय सेना (Indian Army) में अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
आईएमए की ट्रेनिंग का अनुभव किया साझा:
गांव पहुंचने के बाद सौरभ सिंह (Saurabh Singh) ने अपने परिवार और ग्रामीणों के साथ भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy-IMA) में बिताए प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 13 जून को देहरादून (Dehradun) स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (Indian Military Academy-IMA) में आयोजित पासिंग आउट परेड (Passing Out Parade) में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (Droupadi Murmu) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई थीं। चार वर्षों के कठिन, अनुशासित और चुनौतीपूर्ण सैन्य प्रशिक्षण के बाद उन्हें भारतीय सेना (Indian Army) में कमीशन प्राप्त हुआ।
परिजनों ने जताई खुशी:
सौरभ सिंह (Saurabh Singh) के पिता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कहा कि बेटे की सफलता से पूरा परिवार बेहद खुश है। उनके अनुसार सौरभ का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था, जो अब पूरा हो गया है। वहीं दादा रामदुलार सिंह (Ramdular Singh) ने बताया कि सौरभ शुरू से ही मेधावी और मेहनती रहा है। उसकी इस उपलब्धि से पूरा परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा:
ग्रामीणों का कहना है कि सौरभ सिंह (Saurabh Singh) की सफलता गांव के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। एक किसान परिवार से निकलकर भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट बनना यह दर्शाता है कि लगन, मेहनत और अनुशासन के बल पर बड़े लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। गांववासियों ने उनकी उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान और प्रेरणा का विषय बताया।
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रिपोर्ट : सऊद अंसारी
ब्यूरो: हसीन अंसारी