बलिया पर संजय निषाद के विवादित बयान से सियासी घमासान…

Report: बिहारी उपाध्याय

बलिया (Ballia) के बांसडीह (Bansdih) क्षेत्र में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी (Nishad Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद (Dr. Sanjay Nishad) का वक्तव्य चर्चा का विषय बन गया। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उनके एक बयान ने विवाद को जन्म दे दिया। वक्तव्य के दौरान उन्होंने बलिया के लोगों को लेकर एक टिप्पणी की, जिसे बाद में उन्होंने स्वयं ही सुधारते हुए स्पष्ट किया कि उनका आशय बलिया को क्रांतिकारी भूमि के रूप में प्रस्तुत करने का था।

कार्यक्रम का संदर्भ: बांसडीह में आयोजित इस कार्यकर्ता सम्मेलन में डॉ. संजय निषाद कार्यकर्ताओं को संगठनात्मक रूप से मजबूत करने और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर चर्चा करने पहुंचे थे। मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने अपने वक्तव्य की शुरुआत बलिया के इतिहास और उसकी भूमिका पर टिप्पणी करते हुए की, जिसके बाद उनकी कही गई कुछ बातों ने लोगों का ध्यान खींच लिया।

विवादित टिप्पणी पर हलचल: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “क्योंकि यह बलिया है और यहां के लोग अंग्रेजों के दलाल बहुत थे। और दलाली का सिस्टम चल रहा है अभी भी। इसी लिए बलिया अभी बर्बाद है।” इस कथन ने मौजूद कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में हलचल पैदा कर दी। हालांकि उन्होंने तुरंत अपने शब्दों को पलटते हुए कहा कि बलिया बागी बलिया के नाम से जाना जाता है और यहां के लोगों ने अंग्रेजों को मारकर भगाया था। उन्होंने बलिया को देश को आज़ाद कराने में अग्रणी बताया और इस भूमि को क्रांतिकारी बताया।

बयान बदलने का प्रयास: अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य बलिया के ऐतिहासिक संघर्ष और बागी स्वभाव को रेखांकित करना था। उन्होंने कहा कि बलिया की इसी ऐतिहासिक पहचान के सम्मान में वे यहां दो घंटे रुककर कार्यकर्ताओं को विस्तार से सुनना और समझना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मंच से कहा कि यदि कार्यकर्ता सतर्क न हुए तो ठेकेदारों का प्रभाव संगठन और समाज के लिए नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने कहा कि “नहीं तो ये ठेकेदार लोग सत्यानाश कर देंगे। अभी तो इतना ही है। इसके बाद और अभी है।”

स्थानीय प्रतिक्रिया और राजनीतिक रंग: इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कार्यकर्ताओं के बीच यह मुद्दा गंभीर रूप से उठाया जा रहा है कि क्या मंत्री द्वारा कही गई प्रारंभिक पंक्ति केवल भाषण का एक हिस्सा थी या फिर इसे लेकर कोई स्पष्टिकरण आवश्यक है। हालांकि उन्होंने तुरंत ही अपने बयान को सुधारते हुए बलिया के लोगों की क्रांतिकारी भूमिका का उल्लेख किया, लेकिन विवाद अभी भी थमता दिखाई नहीं दे रहा है।


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