संगम तट पर आधुनिक टेंट सिटी हुई विकसित…

लखनऊ (Lucknow): मकर संक्रांति सहित अन्य प्रमुख स्नान पर्वों पर प्रयागराज (Prayagraj) के संगम तट पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी विकसित की गई है। संगम की पुण्य धारा में स्नान करने देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का लगातार आगमन हो रहा है। इसी क्रम में आगंतुकों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्मरणीय अनुभव देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (UPSTDC) द्वारा संगम तट की रेत पर अत्याधुनिक टेंट कॉलोनी बसाई गई है। यह टेंट सिटी कल्पवासियों और पर्यटकों के लिए आस्था के साथ आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभरी है, जहां आध्यात्मिक वातावरण के साथ आधुनिक सुविधाओं का समन्वय देखने को मिल रहा है।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित टेंट कॉलोनी:
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पहले विकसित इस टेंट कॉलोनी में कुल 50 अत्याधुनिक कॉटेज बनाए गए हैं। इन कॉटेज की ऑनलाइन बुकिंग उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (UPSTDC) की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से की जा सकती है। टेंट कॉलोनी को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे अलग-अलग बजट और जरूरतों के अनुसार श्रद्धालु विकल्प चुन सकें। इसमें प्रीमियम, लग्जरी और डीलक्स श्रेणी के कॉटेज शामिल हैं।

तीन श्रेणियों में ठहरने की व्यवस्था:
टेंट कॉलोनी में 15 हजार रुपये किराए वाले प्रीमियम कॉटेज, 11 हजार 500 रुपये वाले लग्जरी कॉटेज और 7 हजार 500 रुपये वाले डीलक्स कॉटेज उपलब्ध कराए गए हैं। कुल 50 कॉटेज में से 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स श्रेणी के हैं। इन सभी कॉटेज में ठहरने वाले श्रद्धालुओं के लिए उसी शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। भोजन व्यवस्था में शुद्धता और परंपरा का विशेष ध्यान रखा गया है, ताकि श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों के साथ स्वास्थ्य और सुविधा दोनों का अनुभव कर सकें।

आध्यात्मिक माहौल और सांस्कृतिक रंग:
टेंट कॉलोनी परिसर में यज्ञशालाओं का निर्माण किया गया है, जहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हो रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं के अनुभव को और समृद्ध बनाने के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसी उद्देश्य से कलाग्राम विकसित किया गया है, जहां स्थानीय शिल्प और लोककला को प्रदर्शित किया जा रहा है। यह पहल न केवल पर्यटकों को क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़ती है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को अपनी कला दिखाने का अवसर भी प्रदान करती है।

रोजगार और नवाचार को बढ़ावा:
पर्यटन मंत्री ने बताया कि माघ मेला 2026 के दौरान रोजगार और नवाचार को विशेष रूप से प्रोत्साहन मिला है। संगम टेंट कॉलोनी में एक जिला एक उत्पाद (ODOP) प्रदर्शनी के माध्यम से प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला को मंच दिया गया है। यहां लगाए गए स्टॉलों पर मूंज से बने विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित और विक्रय किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों को सीधे रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मूंज कला को मिल रहा नया मंच:
माघ मेला 2026 केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को ही मजबूत नहीं कर रहा, बल्कि उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए भी एक बड़ा व्यापारिक मंच बनकर उभरा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बनी डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी वस्तुएं पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला वर्षों से कारीगरों द्वारा संरक्षित और विकसित की जा रही है। अब यह कला आधुनिक स्वरूप में सामने आकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।

पर्यटन और संस्कृति का समन्वय:
जयवीर सिंह के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप माघ मेला केवल आस्था तक सीमित आयोजन नहीं है, बल्कि यह पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कला को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बन चुका है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (UPSTDC) द्वारा विकसित संगम टेंट कॉलोनी इसका उदाहरण है, जहां श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परिवेश का अनुभव मिल रहा है। एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जैसी योजनाओं के माध्यम से पारंपरिक शिल्प को मंच देकर स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। माघ मेला 2026 इस सोच को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान को नई मजबूती देता नजर आ रहा है।

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