रिपोर्टर: अमित कुमार
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से सामने आई इस खबर में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए हरिद्वार (Haridwar) से निकले साधु-संतों की अनोखी यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है। सनातन का ध्वजवाहक बनकर दर्जनों साधु-संत पांच वर्षों तक पैदल यात्रा कर पूरे देश में सनातन संस्कृति का संदेश फैलाने निकले हैं। इसी क्रम में बलिया जिले के दुबहड़ गांव में पहुंचने पर इन साधु-संतों का समाजसेवी पिंटू सिंह ने जोरदार स्वागत किया। ग्रामीणों की मौजूदगी में साधु-संतों को सम्मानित किया गया और ठंड से बचाव के लिए कंबल भी भेंट किए गए।

साधु-संतों ने बताया कि उनकी यह पदयात्रा हरिद्वार से शुरू होकर देश के चारों धाम और बारह ज्योतिर्लिंगों तक जाएगी। यह यात्रा चार से पांच वर्षों में पूरी होगी और अंत में पुनः हरिद्वार में ही समाप्त होगी। साधु-संतों का कहना है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की परंपराओं, मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रहें।
ज्योतिर्लिंग दर्शन की अभिलाषा:
साधु-संतों ने बातचीत में कहा कि वे देश के सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने का संकल्प लेकर निकले हैं। हालांकि चीन और भारत के बीच भूमि विवाद के चलते कैलाश मानसरोवर ज्योतिर्लिंग के दर्शन न कर पाना उनके लिए बेहद दुखद है। उनका कहना है कि उनके पूर्वजों ने पैदल यात्रा कर कैलाश मानसरोवर तक दर्शन किए थे और वे भी उसी परंपरा को निभाना चाहते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में यह संभव न हो पाने का उन्हें गहरा अफसोस है।
नकली साधुओं से सतर्क रहने की अपील:
यात्रा के दौरान साधु-संतों ने समाज को नकली साधुओं से सावधान रहने की अपील भी की। उनका कहना है कि कुछ लोग साधु का भेष धारण कर सनातन धर्म को बदनाम कर रहे हैं, जिससे असली साधु-संतों की छवि भी प्रभावित हो रही है। साधु-संतों ने सरकार से मांग की कि देश के सभी अखाड़ों से जुड़े साधु-संतों का पूरा डाटा सरकार के पास होना चाहिए, ताकि असली और नकली साधुओं के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सके।
दुबहड़ गांव में भव्य स्वागत:
बलिया जिले के दुबहड़ गांव में पहुंचने पर इन साधु-संतों का ग्रामीणों ने खुले दिल से स्वागत किया। समाजसेवी पिंटू सिंह ने साधु-संतों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे सनातनी संत समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और प्रचार के लिए निकले इन साधु-संतों का स्वागत कर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। ठंड के मौसम को देखते हुए कंबल भेंट कर सेवा का अवसर पाकर वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं।
सनातन संस्कृति का संदेश:
साधु-संतों की यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि समाज को एकजुट करने और सांस्कृतिक चेतना जागृत करने का भी माध्यम है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने साधु-संतों से आशीर्वाद लिया और उनकी यात्रा की सफलता की कामना की। बलिया में हुए इस स्वागत कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र में सनातन संस्कृति के प्रति एक सकारात्मक संदेश दिया है।
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