वाराणसी। देश की संस्कृति को लेकर जहां चारों तरफ बहस छिड़ी हुई है, तो वहीं कई बड़े नेता सनातन को लेकर बड़ी-बड़ी बातें भी कर रहे हैं। इसी बीच संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम की शुरुआत हो गई है। एक अप्रैल से 13 पाठ्यक्रमों में दाखिले की शुरुआत होगी। ख़बर के अनुसार मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम में मंदिर निर्माण के सिद्धांत, मूर्ति प्रतिष्ठा, प्राण प्रतिष्ठा, वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन, भीड़ प्रबंधन, मंदिर के लिए भूखंड का चयन और निर्माण के लिए जरूरी वास्तुशास्त्री सिद्धांतों को शामिल किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रविवार को विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने बताया कि मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम शुरू करने वाला यह देश का पहला विश्वविद्यालय है। वहीं, दो साल चल रहे ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का दीक्षांत समारोह 26 मार्च को होगा और ऑनलाइन प्रमाणपत्र भी दिए जाएंगे। अभी तक देश-विदेश के दो हजार विद्यार्थी ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र में पंजीकृत हैं। अभ्यर्थियों की मांग पर मंदिर प्रबंधन के साथ ही पालि और प्राकृत पाठ्यक्रम में भी दाखिले होंगे।
कैसे करें आवेदन?
निदेशक प्रो. रमेश प्रसाद ने बताया कि कर्मकांड, वेद, अर्चक, ज्योतिष एवं कुडली विज्ञान, वास्तु विज्ञान, भाषा शिक्षण, योग, दर्शन, वेदांत, व्याकरण, पालि, प्राकृत और मंदिर प्रबंधन पाठ्यक्रम में एक अप्रैल से 15 मई तक ऑनलाइन दाखिले होंगे। http://www.ssvvostc.ac.in पर आवेदन किया जा सकता है।
क्या है शुल्क?
त्रैमासिक पाठ्यक्रम के लिए एक हजार, छह माह के पाठ्यक्रम के लिए 15 सौ और वार्षिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए दो हजार रुपये शुल्क निर्धारित है। दाखिले के लिए कोई योग्यता निर्धारित नहीं है। ऑनलाइन कक्षाएं शाम को छह से 10 बजे तक संचालित होंगी।

