कोर्ट की सख़्ती: संभल हिंसा मामले में ASP अनुज चौधरी समेत 20 पर होगी FIR…

संभल हिंसा से जुड़े एक मामले में अदालत का अहम आदेश सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने ASP अनुज चौधरी समेत 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश मंगलवार को जारी हुआ, हालांकि इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से बाद में सामने आई। मामला हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने से जुड़ा है, जिसे लेकर पीड़ित के पिता ने अदालत का रुख किया था।

यह आदेश Sambhal (संभल) जिले की घटना से संबंधित है, जहां 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे। अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस प्रशासन ने इस आदेश के खिलाफ अपील करने की बात कही है।

कोर्ट का आदेश और मामला:
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट Vibhanshu Sudhir (विभांशु सुधीर) की अदालत ने ASP Anuj Chaudhary (अनुज चौधरी) और Inspector Anuj Tomar (अनुज तोमर) सहित कुल 20 अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया। यह आदेश उस याचिका पर दिया गया, जो एक घायल युवक के पिता की ओर से दाखिल की गई थी। अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद पाया कि शिकायतकर्ता के आरोपों की जांच आवश्यक है।

आदेश 9 जनवरी 2026 को पारित किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी मंगलवार को सामने आई, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया। अदालत के निर्देशों के अनुसार संबंधित थाने में FIR दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी है।

युवक के पिता की याचिका:
Nakhasa (नखासा) थाना क्षेत्र के मोहल्ला Khaggu Sarai Anjuman (खग्गू सराय अंजुमन) निवासी यामीन ने 6 फरवरी 2025 को CJM कोर्ट में याचिका दायर की थी। यामीन का आरोप है कि उनका बेटा आलम 24 नवंबर 2024 को रस्क यानी टोस्ट बेचने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान वह Shahi Jama Masjid (शाही जामा मस्जिद) क्षेत्र में पहुंचा, जहां पुलिस कार्रवाई के बीच उसे गोली लग गई।

याचिका में कहा गया कि पुलिसकर्मियों ने हिंसा के दौरान अनुचित बल प्रयोग किया, जिसके कारण आलम गंभीर रूप से घायल हुआ। इस मामले में तत्कालीन CO Sambhal (सीओ संभल) अनुज चौधरी और Kotwali Sambhal (संभल कोतवाली) के इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 12 पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया था।

इलाज और वकील का पक्ष:
यामीन के अधिवक्ता Chaudhary Akhtar Hussain (चौधरी अख्तर हुसैन) ने बताया कि उनके मुवक्किल के बेटे ने पुलिस के डर से छिपकर इलाज कराया। बाद में पूरे मामले को अदालत के सामने रखा गया। वकील के अनुसार, अदालत से पूर्व सीओ अनुज चौधरी और पूर्व इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित अन्य अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की गई थी।

अख्तर हुसैन ने मंगलवार शाम को आदेश की पुष्टि की, हालांकि देर शाम आदेश जारी होने के कारण उन्हें लिखित प्रति अभी तक प्राप्त नहीं हुई थी। उनका कहना है कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करना कानूनन अनिवार्य है।

पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया:
Sambhal Police (संभल पुलिस) के SP Krishna Kumar Bishnoi (कृष्ण कुमार बिश्नोई) ने इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभल हिंसा की Judicial Inquiry (न्यायिक जांच) पहले ही हो चुकी है। इसी आधार पर पुलिस प्रशासन का मानना है कि FIR दर्ज करने की आवश्यकता नहीं है।

SP ने स्पष्ट किया कि पुलिस इस आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में अपील करेगी। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस की भूमिका को पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है।

वर्तमान तैनाती और पृष्ठभूमि:
वर्तमान में Anuj Chaudhary (अनुज चौधरी) Firozabad (फिरोजाबाद) में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के पद पर तैनात हैं। संभल हिंसा के समय वह CO Sambhal थे। बाद में उनका प्रमोशन हुआ। वहीं Anuj Tomar (अनुज तोमर) इस समय Chandausi Kotwali (चंदौसी कोतवाली) के थाना प्रभारी हैं।

संभल हिंसा और एक विवादित बयान को लेकर अनुज चौधरी पहले भी चर्चा में रहे हैं। इस पृष्ठभूमि के कारण अदालत का आदेश और अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

24 नवंबर की हिंसा का पूरा घटनाक्रम:
Sambhal Jama Masjid (संभल जामा मस्जिद) को लेकर हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि यह स्थल पहले Harihar Mandir (हरिहर मंदिर) था, जिसे 1529 में तुड़वाकर मस्जिद का रूप दिया गया। इस दावे को लेकर 19 नवंबर 2024 को Sambhal Court (संभल कोर्ट) में याचिका दायर की गई थी।

उसी दिन Civil Judge Senior Division Aditya Singh (आदित्य सिंह) ने मस्जिद के अंदर सर्वे का आदेश दिया और Ramesh Singh Raghav (रमेश सिंह राघव) को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया गया। 19 नवंबर को ही सर्वे टीम मस्जिद पहुंची और लगभग दो घंटे तक सर्वे हुआ, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका।

इसके बाद 24 नवंबर को दोबारा सर्वे शुरू हुआ। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और हालात बिगड़ गए। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी।

हिंसा में मौतें और कार्रवाई:
24 नवंबर की हिंसा में गोली लगने से चार लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान SP कृष्ण कुमार बिश्नोई, CO अनुज चौधरी, एक डिप्टी कलेक्टर समेत कुल 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया था।

हिंसा के बाद पुलिस ने 3 महिलाओं सहित 79 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया। Sambhal Kotwali (संभल कोतवाली) और Nakhasa Police Station (नखासा थाना) में कुल 12 FIR दर्ज की गईं।

चार्जशीट और राजनीतिक पहलू:
पुलिस ने इस मामले में Samajwadi Party (समाजवादी पार्टी) के सांसद Ziaurrahman Barq (जियाउर्रहमान बर्क), विधायक Iqbal Mahmood (इकबाल महमूद) के बेटे Suhail Iqbal (सुहैल इकबाल) सहित 40 लोगों को नामजद किया था। इसके अलावा 2750 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई।

18 जून को SIT ने 1128 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सांसद बर्क सहित 23 लोगों के नाम शामिल थे। हालांकि विधायक के बेटे सुहैल इकबाल का नाम चार्जशीट में नहीं रखा गया।

कानूनी प्रक्रिया पर नजर:
अदालत के FIR दर्ज करने के आदेश के बाद अब यह मामला एक नए मोड़ पर आ गया है। एक ओर पीड़ित पक्ष न्याय की उम्मीद जता रहा है, वहीं पुलिस प्रशासन इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में उच्च अदालत का फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।

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