उत्तर प्रदेश के Sambhal जनपद में शुक्रवार सुबह प्रशासन द्वारा अवैध निर्माण के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान बुलडोजर कार्रवाई से क्षेत्र में हलचल देखी गई। सुबह करीब साढ़े 9 बजे से शुरू हुई इस कार्रवाई में मस्जिद की मीनार और आसपास बनी दुकानों को हटाने का काम किया गया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।
मीनार गिराने के लिए हाइड्रा मशीन का उपयोग:
कार्रवाई के दौरान मस्जिद की करीब 35 फीट ऊंची मीनार को गिराने के लिए हाइड्रा मशीन बुलाई गई। प्रशासन की ओर से पूरे क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी गई थी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। करीब 50 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे और आम लोगों की आवाजाही को सीमित किया गया। इसके बावजूद कुछ स्थानीय लोग छतों से इस कार्रवाई को देखते नजर आए।
सरकारी जमीन पर बने हिस्सों को हटाने के निर्देश:
प्रशासन द्वारा यह भी बताया गया कि कुछ मकानों के हिस्से सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। इस संबंध में ग्रामीण गुलाम और आसमा को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। निर्देशों के बाद दोनों ने अपने-अपने मकानों के आगे बने हिस्सों को खुद ही हटाना शुरू कर दिया।
पहले भी हो चुकी थी कार्रवाई की कोशिश:
इससे पहले 5 अप्रैल को भी इसी स्थान पर कार्रवाई की योजना बनाई गई थी। उस समय बुलडोजर चालक ने मीनार गिराने से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया था। हालांकि उस दिन मदरसा, पांच दुकानें और मस्जिद का गेट हटाया गया था, लेकिन कुछ हिस्से शेष रह गए थे, जिन्हें अब हटाया जा रहा है।
30 साल पुराना मामला बताया जा रहा:
जानकारी के अनुसार यह मामला मुबारकपुर बंद गांव से जुड़ा है, जहां लगभग 30 वर्ष पहले सरकारी जमीन पर निर्माण किया गया था। करीब पांच वर्ष पहले इसी स्थान पर मस्जिद का निर्माण हुआ था। इसके अलावा वहां दुकानें और कुछ मकान भी बनाए गए थे। इस जमीन पर दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी मौजूद बताए गए हैं।
नोटिस के बाद शुरू हुई कार्रवाई:
अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच कराई और 28 मार्च को नोटिस जारी किया गया। इसके बाद 30 मार्च से निर्माण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। स्थानीय स्तर पर कुछ हिस्सों को हटाया गया, लेकिन शेष निर्माण को हटाने के लिए प्रशासन को आगे आना पड़ा।
ग्रामीणों ने रखी अपनी बात:
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदते समय यह जानकारी नहीं थी कि वह सरकारी जमीन है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि यदि उन्हें जमीन खाली करनी पड़ रही है, तो उन्हें भुगतान की गई राशि वापस मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, ग्राम प्रधान से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल अवैध निर्माणों को हटाया जाए।
प्रशासन का रुख सख्त:
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार नहीं किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
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