लखनऊ (Lucknow) के गोमतीनगर (Gomti Nagar) स्थित 270 एकड़ भूमि पर विकसित सहारा शहर (Sahara City) का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। इस मामले में लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) और सहारा इंडिया (Sahara India) आमने-सामने हैं। नगर निगम का दावा है कि यह भूमि ग्रीन बेल्ट (Green Belt) विकसित करने के उद्देश्य से दी गई थी, लेकिन लीज की शर्तों का उल्लंघन करते हुए यहां आवासीय और व्यावसायिक निर्माण कर दिए गए। वहीं सहारा का कहना है कि परियोजना में करीब 2480 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए जमीन पर कब्जा कर लिया गया। अब इस पूरे मामले पर 31 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है।
30 साल पुरानी लीज बनी विवाद की वजह:
इस पूरे विवाद की शुरुआत 22 अक्टूबर 1994 से मानी जा रही है, जब लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) ने गोमतीनगर (Gomti Nagar) की करीब 270 एकड़ जमीन सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड (Sahara India Housing Limited) को 100 रुपये के स्टांप पर लाइसेंस डीड के जरिए उपलब्ध कराई थी। समझौते के अनुसार कंपनी को प्रति एकड़ एक हजार रुपये वार्षिक शुल्क देना था। इस भूमि में लगभग 170 एकड़ नगर निगम और 100 एकड़ एलडीए (LDA) की जमीन शामिल थी। लीज की प्रमुख शर्त यह थी कि पूरे क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित किया जाएगा।
नगर निगम ने लगाया शर्तें तोड़ने का आरोप:
लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) का आरोप है कि जिस भूमि पर हरित क्षेत्र विकसित होना था, वहां समय के साथ आवासीय और व्यावसायिक निर्माण कर दिए गए। नगर निगम के अनुसार परिसर में लग्जरी बंगले, आधुनिक थिएटर, पांच हजार क्षमता वाला सभागार और अन्य निर्माण किए गए, जो लीज की मूल शर्तों के अनुरूप नहीं थे। अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2020 और 2025 में कई नोटिस जारी किए गए, लेकिन सुधार नहीं होने पर लीज समाप्त कर जमीन का कब्जा वापस ले लिया गया।
सहारा का पक्ष भी सामने आया:
दूसरी ओर सहारा इंडिया (Sahara India) का दावा है कि उसने इस परियोजना में करीब 2480 करोड़ रुपये का निवेश किया और 87 से अधिक भवन विकसित किए। कंपनी का कहना है कि बिना पूरी वैधानिक प्रक्रिया अपनाए भूमि पर कब्जा किया गया। साथ ही यदि आवश्यकता होती तो वह लीज विस्तार के लिए अतिरिक्त धनराशि जमा करने को भी तैयार थी। फिलहाल कंपनी ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता ने उठाए लीज प्रक्रिया पर सवाल:
मामले के याचिकाकर्ता अधिवक्ता बीके सिंह (BK Singh) का कहना है कि शुरुआत से ही यह लीज प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी। उनके अनुसार 100 रुपये के स्टांप पर इतनी बड़ी भूमि का आवंटन और पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के विपरीत थी। उनका कहना है कि जमीन ग्रीन बेल्ट के लिए दी गई थी, लेकिन बाद में इसका उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों के लिए किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 30 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद किसी भी संस्था को लीज बढ़ाने का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता।
नई विधानसभा परियोजना से भी जुड़ा मामला:
इसी बीच राज्य सरकार इसी भूमि पर नए विधानसभा परिसर के निर्माण की तैयारी कर रही है, जिसकी जिम्मेदारी एलडीए (LDA) को सौंपी गई है। ऐसे में यह विवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल इस जमीन पर स्वामित्व और लीज की वैधता को लेकर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
31 जुलाई को होगी अहम सुनवाई:
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) द्वारा 22 अप्रैल 2026 को सहारा की याचिका खारिज किए जाने के बाद कंपनी ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया। अब 31 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित भूमि विवाद पर आगे की कानूनी दिशा तय हो सकती है।
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