लखनऊ (Lucknow)। प्रदेश में बालिकाओं की सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ रहा है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में अब तक प्रदेश के हजारों विद्यालयों में यह कार्यक्रम प्रभावी रूप से संचालित किया गया है, जिसके अंतर्गत बड़ी संख्या में बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण मिला है। इस पहल से बालिकाओं में न केवल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है, बल्कि उनके व्यक्तित्व में भी सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

प्रदेश भर के विद्यालयों में व्यापक प्रशिक्षण:
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में अब तक प्रदेश के 38,465 विद्यालयों में 10,78,402 बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। यह प्रशिक्षण विद्यालय स्तर पर नियमित रूप से आयोजित किया गया, जिससे बालिकाएं अपने ही शैक्षिक वातावरण में आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सीख सकें। इन आंकड़ों से कार्यक्रम की व्यापकता और प्रभावशीलता का स्पष्ट आकलन किया जा सकता है।

आत्मसम्मान और निर्णय क्षमता का विकास:
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाओं में आत्मसम्मान, सतर्कता, साहस और निर्णय लेने की क्षमता का भी विकास हुआ है। नियमित अभ्यास और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के चलते बालिकाएं अब स्वयं को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस कर रही हैं। विद्यालय परिसरों में यह प्रशिक्षण उनके दैनिक व्यवहार और सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है।
सरकारी नेतृत्व में सशक्त पहल:
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह (Sandeep Singh) के नेतृत्व में यह कार्यक्रम लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के जरिए प्रदेश की बेटियों को आत्मरक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास और साहस का संबल दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक प्रशिक्षित बालिका स्वयं को सक्षम और निडर महसूस करे तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग बने।
वित्तीय संसाधन और प्रभावी क्रियान्वयन:
भारत सरकार (Government of India) की पीएबी के अंतर्गत इस कार्यक्रम के लिए शैक्षिक सत्र 2025-26 में ₹2282.80 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि प्रदेश के 45,656 उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों में प्रशिक्षण के सुचारु संचालन के लिए उपयोग की जा रही है। इससे प्रशिक्षण को व्यवस्थित, नियमित और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने में मदद मिली है।
डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता:
कार्यक्रम की निगरानी के लिए यूडीआईएसई+ (UDISE+) के माध्यम से विकसित ‘वीरांगना’ मॉनिटरिंग पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। इस पोर्टल पर प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बालिकाओं की ऑनलाइन उपस्थिति, प्रशिक्षण वीडियो और अन्य शैक्षिक सामग्री दर्ज की जाती है। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। शिक्षा विभाग की अधिकारी मोनिका रानी (Monika Rani) ने इसे बालिकाओं के शैक्षिक और व्यक्तित्व विकास के लिए आवश्यक कदम बताया है।
सुरक्षित और सशक्त भविष्य की ओर कदम:
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम आज प्रदेश में सुरक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर पीढ़ी के निर्माण की मजबूत नींव रख रहा है। प्रशिक्षित बालिकाओं में दिख रहा आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यह पहल आने वाले समय में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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