मौधा/गाजीपुर। बिहार के राजगीर में आयोजित एशिया कप हॉकी के फाइनल में भारत ने दक्षिण कोरिया को 4-1 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस शानदार जीत में उत्तर प्रदेश के जनपद गाजीपुर के करमपुर स्थित मेघबरन सिंह स्टेडियम से जुड़े युवा खिलाड़ी राजकुमार पाल का योगदान बेहद अहम रहा। उनकी दमदार खेल क्षमता और मिडफील्ड में लगातार दबाव बनाने की कला ने टीम इंडिया को चौथी बार खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2026 विश्व कप की टिकट पक्की
भारतीय टीम ने इस जीत के साथ न सिर्फ एशिया कप अपने नाम किया बल्कि 2026 में होने वाले हॉकी विश्व कप के लिए भी क्वालिफाई कर लिया। राजकुमार पाल की बेहतरीन परफॉर्मेंस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
फाइनल मुकाबले का रोमांच
- मुकाबले की शुरुआत से ही भारतीय टीम ने आक्रामक रुख अपनाया।
- पहले ही मिनट में सुकजीत सिंह ने फील्ड गोल दागकर टीम को बढ़त दिला दी।
- इसके बाद दिलप्रीत सिंह ने दूसरे और तीसरे क्वार्टर में दो शानदार गोल कर बढ़त को और मजबूत किया।
- चौथे क्वार्टर की शुरुआत में अमित रोहिडास ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलते हुए भारत को 4-0 की अजेय स्थिति में पहुंचा दिया।
- कोरिया की ओर से डाइन सोन ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए एकमात्र गोल किया।
- भारत ने पूरे टूर्नामेंट में अपराजित रहते हुए (5 जीत, 1 ड्रॉ) खिताब जीता और 2026 में होने वाले हॉकी विश्व कप के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली।
राजकुमार पाल का दमदार खेल
भारतीय मिडफील्ड के अहम खिलाड़ी राजकुमार पाल ने पूरे मैच के दौरान अपनी फुर्ती और खेल समझ का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने कोरिया की आक्रमण पंक्ति को कई बार रोका और लगातार दबाव बनाकर भारतीय स्ट्राइकरों को मौका उपलब्ध कराया। उनकी फिटनेस और खेल रणनीति ने टीम की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।
भारत का गौरव—मेघबरन स्टेडियम
गाजीपुर के करमपुर स्थित मेघबरन सिंह स्टेडियम अब तक भारतीय हॉकी टीम को 17 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दे चुका है। इनमें ओलंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ जैसे बड़े मंचों पर खेलने वाले सितारे भी शामिल हैं। राजकुमार पाल भी इसी परंपरा के चमकते सितारे हैं।
सीमित संसाधनों से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
राजकुमार ने कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत और जुनून से यह मुकाम हासिल किया। मेघबरन स्टेडियम के महासचिव अनिकेत सिंह ने कहा कि राजकुमार ने साबित कर दिया कि अगर जुनून और लगन हो तो छोटे गांव से निकलकर भी विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया जा सकता है।

