रिपोर्ट: शैलेंद्र शर्मा/अभिनेंद्र
…तो तैयार हो जाइए गाजीपुर से लखनऊ तक के कष्टहीन सफर को करने के लिए। रनवे जैसी सड़क पर लखनऊ की दूरी अब होगी 3 घंटे में पूरी। ये समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे नही, ये है पूर्वांचल एक्सप्रेस वे। जहां एयरफोर्स के जेट प्लेन भी उतरेंगे। जी हां आपने बिलकुल सही सुना, सुनिए यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी को….
जी हां यहां पर बात एयर स्ट्रिप की हो रही है यहां पर बात वायुसेना के विमान को उतारने की हो रही है तो थोड़ा पुरानी यादें भी ताजा कर लेते हैं। अब इस बात को सुनकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का चेहरा सामने आता है…
जी हां यह बात करीब साढ़े 4 साल पहले की है यानी 21 नवंबर 2016, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट वाले एक्सप्रेस वे पर वायु सेना के 6 जेट प्लेन का सफल ट्रायल करवाया था। उस समय महज ये ट्रायल नहीं था देश के लिए बहुत बड़ी बात थी कि एक ऐसा एक्सप्रेसवे जिसका इस्तेमाल वायु सेना भी कर सकती है। वो आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे था। इसको लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खूब वाहवाही लूटी थी। इसके ठीक एक महीने बाद यानी 22 दिसंबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ से आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया तक के लिए एक और एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया। जिसको समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे कहा गया। उस वक्त लगातार नई योजनाओं की चर्चाएं अखबारों की सुर्खियां थी। उस समय तक इस योजना के लिए 40 फीसदी जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया गया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया था कि इस कार्य को 30 महीने के अंदर पूरा करवाएंगे। दवा करते भी क्यों न क्योंकि उस वक्त आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे के कार्य को मात्र 22 महीने में पूरा करवा के कीर्तिमान हासिल कर लिया था। लेकिन शायद जनता को समाजवादी पार्टी की बात रास नहीं आई और 2017 में सत्ता परिवर्तन हो गया।
एक तरफ जहां 2017 विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव सैंकड़ों नई योजनाओं और एक्सप्रेसवे के कीर्तिमान से सुर्खियां बटोर रहे थे तो वहीं दूसरी तरफ विकास के परिभाषा को ज़मीन पर उतारते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रथ पूर्वांचल में अपनी छटा बिखेर रहा था। वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तो गाज़ीपुर में केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा विकास की नई परिभाषाओं से जनमानस के मन को मोह रहे थे। नतीज़ा आप सबको पता है कि 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बंपर सीटों से चुनाव जीता और मुख्यमंत्री की रेस में मनोज सिन्हा पिछड़ गए और गद्दी संभाली योगी आदित्यनाथ ने। अब नई सरकार थी, नई परिभाषा थी, नई योजनाएं का प्रयास था। तो इसका असर समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर पड़ना भी लाज़मी था। हुआ भी वैसा, समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे बन गया पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, अब ये 6 लेन का एक्सप्रेस वे का नया मैप लखनऊ से गाज़ीपुर तक तय हुआ। अब सूबे में सरकार सीएम योगी की थी, नया रोड मैप था और ये परियोजना सीएम योगी की महत्वाकांक्षी परियोजना बन गई तो 14 जुलाई 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीएम योगी के इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शिलान्यास किया।
राजनीति भी क्या खूब चीज है सत्ता और विपक्ष में खूब खींचातानी चलती है, खैर इस खींचातानी का फायदा यदि जनता को हो तो बल्ले-बल्ले है। अब पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का 97 फ़ीसदी काम पूरा हो चुका है और इसका पूरा फायदा आजमगढ़ गाजीपुर और बलिया की जनता को मिलने वाला है। सरकारें कोई भी हो काम तो करती है बस अपना-अपना देखने का नजरिया है, लेकिन सवाल तो पैदा होता है कि इस तरह की परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए धन की जरूरत पड़ती है और वह धन जनता के द्वारा दिए गए टैक्स के पैसे से इकट्ठा होता है तो धन का सदुपयोग होना चाहिए और कितने कम खर्च में कितना बेहतर काम हो सकता है यह भी समझना चाहिए, तो आइए थोड़ा आगरा लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेस वे में कंपेयर करते हैं:
पूर्वांचल एक्सप्रेस वे करीब 341 किलोमीटर लंबा है परियोजना की लागत करीब साढ़े 22 करोड़ की है और योगी सरकार में शिलान्यास के बाद इसको पूरा करने में समय करीब तीन साल यानी करीब 36 महीने का लग रहा है। वैसे इस परियोजना की शुरुवात दिसंबर 2016 में किया गया था और करीब 40 फीसदी ज़मीन अधिग्रहण का कार्य हो चुका था, तो उसके मुताबिक परियोजना पूरा होने का समय हुआ करीब साढ़े चार साल यानी करीब 55 या 56 महीने। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दावा किया था की वो इस परियोजना को 30 महीने में पूरा करवाएंगे। ये 6 लेन का एक्सप्रेस वे है और भविष्य में 8 लेन हो सकता है। इस एक्सप्रेस वे पर वायुसेना के विमान का ट्रायल हो सकता है।
खैर अब बात करते हैं अखिलेश सरकार में बने आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे की। इसकी लंबाई 302 किलोमीटर है और इसकी लागत करीब 13200 करोड़ आई, इसको पूरा करने में रिकॉर्ड 22 महीने का वक्त लगा, ये भी 6 लेन का एक्सप्रेस वे है जो भविष्य में 8 लेन हो सकता है, इस एक्सप्रेस वे वायुसेना पर 6 जेट प्लेन का ट्रायल हो चुका है। इसमें गंगा और यमुना नदी पर भी आठ लेन पुल है. यह एक्सप्रेस-वे एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट से लैस है, जिससे धुंध और कोहरे में ट्रैफिक चलता रहता है।
रोज़गार पैदा करने की बात दोनो एक्सप्रेस वे को लेकर हुई है। लेकिन नतीजा ये निकलता है कि अखिलेश सरकार बनी आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे को बनाने में करीब 44 करोड़ प्रति किलोमीटर का खर्च आया था और समय लगा था 22 महीने, तो वहीं योगी सरकार वाली पूर्वांचल एक्सप्रेस वे को बनाने में करीब 66 करोड़ प्रति किलोमीटर का खर्च आया और समय लगा करीब दुगने से ज्यादा।
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