प्रयागराज में सनातन परंपरा से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक संस्थान की संपत्ति और उत्तराधिकार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। दारागंज क्षेत्र में स्थित वेंकटेश मंदिर, राम देशिक संस्कृत महाविद्यालय और वैष्णव आश्रम से जुड़ी करोड़ों की संपत्ति पर अवैध कब्जे के प्रयास के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह पूरा मामला महंत पद के उत्तराधिकार को लेकर उत्पन्न हुआ है, जिसमें परंपरा, ट्रस्टी डीड और बायलॉज के उल्लंघन का दावा किया जा रहा है।
उत्तराधिकारी चयन पर उठे सवाल:
आरोप है कि आश्रम के पूर्व महंत पुरषोत्तमाचार्य के देहावसान के बाद उत्तराधिकारी चयन की परंपरागत प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। न्यास परिषद की व्यवस्था और संस्थापक की इच्छा के अनुसार, महंत द्वारा उत्तराधिकारी घोषित न किए जाने की स्थिति में उप-महंतों की सहमति से बैकुण्ठोत्सव के अवसर पर चयन होना था। इसी प्रक्रिया के तहत गरुड़ध्वजाचार्य को महंत पद पर आसीन किए जाने का दावा किया गया है।
परंपरागत पट्टाभिषेक का दावा:
स्वामी अनंताचार्य पक्ष का कहना है कि बैकुण्ठोत्सव के दौरान प्रयागराज में संत समाज की उपस्थिति में गरुड़ध्वजाचार्य का विधिवत पट्टाभिषेक किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए संतों और धार्मिक आचार्यों की मौजूदगी का उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, इसके बाद संस्था और मंदिर का संचालन नए महंत के नेतृत्व में होना तय हुआ।
विरोधी कार्यक्रम की सूचना से विवाद:
पट्टाभिषेक के बाद कथित रूप से एक अलग कार्यक्रम का आमंत्रण सामने आया, जिसमें किसी अन्य व्यक्ति को महंत और उत्तराधिकारी बनाए जाने की बात कही गई। इसे नियम और परंपरा के विरुद्ध बताया जा रहा है। आरोप है कि यह आमंत्रण सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।
UPPSC सदस्य पर आरोप:
इस पूरे विवाद में कल्प राज सिंह, जो उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (Uttar Pradesh Public Service Commission) के मनोनीत सदस्य बताए जा रहे हैं, पर पद और प्रभाव के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। दावा है कि न्यास परिषद के सदस्य होने के बावजूद उन्होंने बायलॉज और संस्थापक की इच्छा के विपरीत कदम उठाए और कथित रूप से किसी अन्य व्यक्ति को महंत पद पर स्थापित करने का प्रयास किया।
पुलिस की भूमिका पर सवाल:
मामले में प्रयागराज पुलिस (Prayagraj Police) की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पुलिस द्वारा मौके पर पीएसी तैनात कर कथित कार्यक्रम को समर्थन देने की तैयारी की जा रही थी, जबकि एक पक्ष की बात नहीं सुनी गई। इसे लेकर संत समाज और स्थानीय लोगों में असंतोष बताया जा रहा है।
दारागंज क्षेत्र के अन्य संस्थान भी चर्चा में:
विवाद केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं बताया जा रहा। दारागंज स्थित वेंकटेश मंदिर संस्कृत महाविद्यालय और उससे जुड़े वैष्णव आश्रम की संपत्ति को लेकर भी इसी तरह के प्रयास होने का आरोप लगाया गया है। दावा है कि यदि यह विवाद इसी तरह आगे बढ़ा तो मध्य भारत के सैकड़ों मंदिरों और धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों पर भी असर पड़ सकता है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग:
स्वामी अनंताचार्य और उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से कई स्तर पर संपर्क किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी कारण मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाया गया है और मंदिर व आश्रम की संपत्ति की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप की मांग की गई है।
शिकायत पत्र के आधार पर आरोप:
मुख्यमंत्री कार्यालय (Chief Minister Office, Uttar Pradesh) को भेजे गए शिकायत पत्र में पूरे घटनाक्रम का विवरण दिया गया है। इसमें महंत चयन की प्रक्रिया, कथित अवैध आमंत्रण और संपत्ति हड़पने के प्रयास का उल्लेख करते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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