संसद (Parliament) के दोनों सदनों में आज नक्सलवाद और लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (Left Wing Extremism) को समाप्त करने के प्रयासों पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान लोकसभा (Lok Sabha) में भाजपा सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि देश से माओवाद को समाप्त करने का लक्ष्य अब पूरा होता हुआ दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) द्वारा तय किया गया लक्ष्य, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में तेजी से हासिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
नक्सलवाद की शुरुआत और विस्तार पर टिप्पणी:
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने चर्चा के दौरान नक्सलवाद की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 1967 में यह एक छोटी घटना के रूप में शुरू हुआ था। उनके अनुसार, यदि उस समय प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो यह समस्या इतनी गंभीर नहीं बनती। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में आदिवासी समाज के साथ भेदभाव हुआ, जिससे हालात बिगड़ते चले गए और वामपंथी उग्रवाद को बढ़ावा मिला।
कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप:
भाषण के दौरान कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने कांग्रेस (Congress) पर आरोप लगाते हुए कहा कि वैचारिक मतभेदों को सुलझाने के बजाय उन्हें बढ़ाया गया, जिसका लाभ उग्रवादी संगठनों को मिला। उन्होंने कहा कि इन गतिविधियों के कारण हजारों हमले हुए, जिनमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की जान गई। साथ ही बच्चों को भी हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया गया, जिससे कई क्षेत्र ‘रेड कॉरिडोर’ और ‘नो-गो जोन’ में बदल गए।
2014 के बाद बदले हालात:
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद परिस्थितियों में बदलाव आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में विकास और विश्वास की नीति को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने बताया कि सरकार ने आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति दी और सुरक्षा बलों को मजबूत किया। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में संवैधानिक व्यवस्था को लागू करने के प्रयास किए गए।
युवाओं की मुख्यधारा में वापसी:
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप 8 हजार से अधिक युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की। उनके अनुसार, यह बदलाव सरकार की रणनीति और नीतिगत प्रयासों का परिणाम है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में स्थिरता और विश्वास का माहौल बना है।
सरकार का स्पष्ट संदेश:
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने अपने वक्तव्य में कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश संविधान के आधार पर चलेगा, न कि हथियारों के बल पर। उन्होंने कहा कि यह नीति नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कदम साबित हो रही है और इससे देश में शांति और विकास को बढ़ावा मिला है।
संसद के बाहर भी दिया बयान:
संसद (Parliament) के बाहर मीडिया से बातचीत में कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने कहा कि लंबे समय तक चली समस्या को वर्तमान सरकार ने कम समय में नियंत्रित किया है। उनके अनुसार, यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।
गृह मंत्री का कड़ा रुख:
गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी सदन में अपने संबोधन के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंसक गतिविधियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी को शिकायत है, तो उसके लिए न्यायिक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन हथियार उठाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने बस्तर (Bastar) क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास बाधित रहा, जिसे अब दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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