महाराजगंज: पंकज चौधरी होंगे यूपी बीजेपी के अगले अध्यक्ष?
रिपोर्टर: बृजेश गुप्ता
महाराजगंज जनपद के सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी उन्हें प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि पिछड़े समाज में उनकी मजबूत पकड़ का लाभ पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में मिल सकता है। परंपरागत मतों को सहेजने के साथ पीडीए समीकरण को कमजोर करने की रणनीति के तहत पार्टी यह दांव खेल सकती है। मौजूदा राजनीतिक गणित के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में पंकज चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।
आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा हर स्तर पर संतुलन साधने में जुटी है। प्रदेश अध्यक्ष के चयन में जातीय और सामाजिक समीकरणों की अहम भूमिका मानी जा रही है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए पंकज चौधरी जैसे अनुभवी और स्वीकार्य चेहरे पर दांव लगाना पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। उनके नाम की चर्चा शुरू होते ही महाराजगंज में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
पिछड़े समाज में मजबूत पकड़ का दावा:
पंकज चौधरी की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जिनकी पिछड़े समाज में गहरी पकड़ मानी जाती है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में उनका कद हमेशा मजबूत रहा है और नेतृत्व ने हर चुनाव में उन पर भरोसा जताया है। संगठनात्मक जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ वे कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करने के लिए भी जाने जाते हैं। लंबे राजनीतिक सफर के बावजूद उनकी जनता से नजदीकी बनी रही है, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।
परंपरागत कुर्मी वोट पर नजर:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपना दल और अन्य सहयोगी दलों के पास रहा परंपरागत कुर्मी वोट भाजपा की ओर आकर्षित करने में पंकज चौधरी की भूमिका अहम हो सकती है। यही कारण है कि पार्टी उन्हें प्रदेश स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। शहर से लेकर गांव तक इस संभावित फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और लोग टीवी व सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
संघ और संगठन से नजदीकी:
पंकज चौधरी को संघ के साथ-साथ पार्टी के कैडर आधारित नेताओं का भी करीबी माना जाता है। चुनावी रणनीतियों को सफलतापूर्वक लागू करने का अनुभव उनके पास पहले से है। यही वजह है कि उन्हें प्रदेश में पिछड़े समाज के प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। संगठन में उनके नाम पर कभी गंभीर विरोध या गतिरोध की स्थिति सामने नहीं आई है।
कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल:
भाजपा कार्यकर्ता डॉ. शांति शरण मिश्र का कहना है कि यदि पार्टी पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी सौंपती है तो यह महाराजगंज के लिए गौरव का विषय होगा। उन्होंने गीता प्रेस के शताब्दी समारोह का उल्लेख करते हुए बताया कि उस दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi (नरेंद्र मोदी) कार्यक्रम और प्रोटोकॉल से हटकर पंकज चौधरी के घर पहुंचे थे। संकरी गलियों से पैदल चलकर उनके घर जाना पूर्वी उत्तर प्रदेश में पंकज चौधरी के राजनीतिक कद को और ऊंचा कर गया, जिससे कुर्मी बिरादरी में उनकी पकड़ और मजबूत हुई।
नगर निगम से संसद तक का सफर:
पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1989 में Gorakhpur (गोरखपुर) नगर निगम से पार्षद के रूप में की थी। 15 नवंबर 1964 को गोरखपुर के एक उद्योगपति परिवार में जन्मे पंकज चौधरी की शिक्षा Gorakhpur University (गोरखपुर विश्वविद्यालय) से हुई। वर्ष 1990 में वे भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्य समिति के सदस्य बने और 1991 में 10वीं लोकसभा में Maharajganj (महाराजगंज) संसदीय सीट से सांसद चुने गए।
इसके बाद 1996 और 1998 में भी वे सांसद बने। वर्ष 1999 में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2004 में उन्होंने फिर वापसी की। 2014 से लगातार वे लोकसभा के सदस्य हैं और पार्टी ने हर परिस्थिति में उन पर भरोसा बनाए रखा। 2019 में दोबारा जीत दर्ज करने के बाद उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया। 2024 में फिर चुनाव जीतकर मंत्री बने।
जिला पंचायत राजनीति में प्रभाव:
महाराजगंज की जिला पंचायत राजनीति में भी पंकज चौधरी का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया है। जिला पंचायत के गठन के बाद उनके परिवार के सदस्य लगातार अध्यक्ष पद पर रहे। विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने जिला पंचायत में अपना प्रभाव बनाए रखा, जिससे उनकी रणनीतिक क्षमता का अंदाजा लगाया जाता है। 1989 में गोरखपुर से अलग होकर महाराजगंज जिला बनने के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया।
आगामी घोषणा पर नजरें:
फिलहाल भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक प्रदेश अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि Maharajganj (महाराजगंज) से पार्टी कार्यकर्ता Lucknow (लखनऊ) पहुंच चुके हैं और घोषणा होते ही स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। पार्टी के अंदरखाने में चल रही चर्चाओं ने इस मुद्दे को और अधिक गरम कर दिया है।
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