पंचायत चुनाव समयसीमा के भीतर क्यों नहीं कराए जा रहे हैं, इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सख्त रुख अपनाते हुए यूपी राज्य निर्वाचन आयोग (UP State Election Commission) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर पूछा है कि क्या संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी या नहीं। इस सवाल ने राज्य में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने की वजह:
दरअसल, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में पंचायत चुनाव टाले जाने को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) तक पहुंच गया है। मंगलवार को याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन (Imtiaz Hussain) की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई कि जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट, विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव में देरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई:
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन (Justice Atul Sreedharan) और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन (Justice Siddharth Nandan) की डिवीजन बेंच में हुई। दोनों न्यायाधीशों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही, अदालत ने यह भी तय किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को दोपहर 2 बजे की जाएगी, जिसमें आयोग को अपनी तैयारी और स्थिति का स्पष्ट विवरण देना होगा।
संवैधानिक समयसीमा का हवाला:
याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन (Imtiaz Hussain) की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अधिकतम पांच वर्षों तक ही सीमित होता है। इससे अधिक अवधि तक कार्यकाल बढ़ाना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है। इस आधार पर उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि समय पर चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
राज्य सरकार की जिम्मेदारी पर जोर:
वहीं, यूपी राज्य निर्वाचन आयोग (UP State Election Commission) की ओर से कोर्ट में यह दलील रखी गई कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12-BB के अनुसार प्रधान के सामान्य चुनाव या उपचुनाव की तारीख तय करने के लिए अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह अधिसूचना राज्य सरकार द्वारा आयोग के परामर्श से जारी की जाती है, इसलिए इस प्रक्रिया में राज्य सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है।
आयोग से मांगी गई स्पष्ट स्थिति:
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग (UP State Election Commission) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि 19 फरवरी 2026 को जारी मौजूदा अधिसूचना के अनुसार क्या वह पंचायत चुनाव कराने की स्थिति में है या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत चुनाव 26 मई 2026 तक या उससे पहले संपन्न हो जाने चाहिए, ताकि संवैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें:
अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की गई है, जहां राज्य निर्वाचन आयोग को अपनी तैयारियों और चुनाव प्रक्रिया की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी देनी होगी। इस सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे यह तय हो सकता है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं।
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